राजस्थान शिक्षा विभाग ने स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अर्थहीन या अटपटे नाम बदलने के लिए शुरू किया ‘सार्थक नाम अभियान’ फिलहाल स्थगित कर दिया है। नामों की सूची जारी होने के बाद यह अभियान विवादों में घिर गया था। सूची में शामिल तमाम नाम अजीबोगरीब थे। भास्कर ऐप ने 15 अप्रैल को खबर प्रकाशित कर इस मुद्दे को उठाया था। इसके चलते विभाग ने इस अभियान पर रोक लगाने का फैसला लिया। दरअसल, शिक्षा विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से 2950 नामों की लिस्ट तैयार करवाई थी। इसका उद्देश्य था कि असार्थक या व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाला नामों को बदलकर बच्चों को बेहतर और सम्मानजनक पहचान दी जा सके। लेकिन लिस्ट में शामिल कई नाम खुद ही आपत्तिजनक और अजीब पाए गए। भयंकर, भिक्षा, मक्खी, दहीभाई, अंधकार और बेचारादास जैसे नामों को लेकर अभिभावक संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई। कई मामलों में लड़कों और लड़कियों के नामों में जेंडर संबंधी गलतियां भी सामने आईं। यही नहीं, सूची में गलतियों की भरमार थी। सामान्य हिंदी शब्द भी गलत लिखे गए थे। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। बैकफुट पर आया शिक्षा विभाग अभिभावकों का कहना था कि बच्चों के नाम बदलने जैसा संवेदनशील विषय बिना पर्याप्त मानवीय जांच और सामाजिक समझ के केवल AI के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इससे बच्चों और परिवारों की भावनाएं आहत हो सकती हैं। बढ़ते विरोध और आलोचना के बाद शिक्षा विभाग ने बैकफुट पर आते हुए इस अभियान को फिलहाल स्थगित कर दिया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अभियान की शुरुआत करते हुए कहा था- कई बच्चों के नाम ऐसे होते हैं, जिनसे उनमें हीन भावना उत्पन्न हो सकती है। लेकिन अब शिक्षा मंत्री के कार्यालय ने बताया कि सार्थक नाम अभियान फिलहाल रोक दिया गया है, आगे इस पर पुनर्विचार किया जाएगा। … ये खबर भी पढ़िए.. शिक्षा विभाग की लिस्ट में अकबर मतलब…महान, मुगल सम्राट:लड़कों के लिए रामप्यारी-बेचारादास और लड़कियों के लिए भिक्षा, मक्खी जैसे नाम सुझाए राजस्थान-स्कूलों में घसीटाराम, नाहर जैसे अटपटे नाम बदल सकेंगे बच्चे:सरकार देगी नए नामों का ऑप्शन, शिक्षा मंत्री बोले- किसी पर कोई दबाव नहीं