जयपुर निवासी 92 साल की बुजुर्ग महिला ने पारिवारिक पेंशन रोकने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। महिला गंगा देवी ने कोर्ट में याचिका दायर करके कहा कि वह चलने-फिरने में असमर्थ है। वह पूरी तरह से अपने 70 साल के बेटे-बहू पर निर्भर है। उन्होंने कहा- उनकी पेंशन फरवरी 2026 से रुकी हुई है। उन्होंने बताया- तकनीकी खामी के कारण उनका जीवित प्रमाण-पत्र अपलोड नहीं होने से उनकी पेंशन रोक दी गई है। साथ ही उनसे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की अपेक्षा की जा रही है। विभाग उन पर आधार या जन-आधार कार्ड के जरिए सत्यापन का दबाव बना रहा है। जबकि इस उम्र में उनके बायोमेट्रिक्स (अंगूठे के निशान) काम नहीं करते और वह शारीरिक रूप से कार्यालय जाने में अक्षम हैं। याचिका में विभाग के इस रवैए को उन्होंने इसे जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया है। हाईकोर्ट में जस्टिस रवि चिरानिया ने 8 अप्रैल को मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा- उम्मीद करते हैं दो महीने में पेंशन जारी हो जाएगी हाईकोर्ट के जस्टिस रवि चिरानिया ने बुजुर्ग महिला गंगा देवी की याचिका पर राज्य सरकार, निदेशक पेंशन व पेंशन वेलफेयर और वित्त विभाग के प्रमुख सचिव से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने आशा जताई कि याचिकाकर्ता की रुकी हुई पेंशन दो महीने में जारी कर दी जाएगी। व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति असंवैधानिक याचिका में गंगा देवी ने कहा- वह सचिवालय सेवा में पूर्व उप-सचिव एम.एल. गौड़ की विधवा हैं। इस आयु में वह हृदय रोग और रीढ़ की हड्डी की गंभीर चोट से जूझ रही हैं। वह बिना वॉकर या सहारे के एक कदम भी नहीं चल सकतीं। पेंशन विभाग के तकनीकी सिस्टम में खराबी के कारण उनका जीवित प्रमाण पत्र अपलोड नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा- उन्हें गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। डोर-स्टेप वेरिफिकेशन अनिवार्य हो याचिकाकर्ता ने गुहार की है कि 75 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए कार्यालय में उपस्थिति की शर्त खत्म कर डोर-स्टेप वेरिफिकेशन (घर पर सत्यापन) की व्यवस्था अनिवार्य की जाए। वहीं चिकित्सा और दैनिक खर्चों के लिए तत्काल 15 लाख रुपए की अंतरिम सहायता राशि दिलवाई जाए। 25 लाख सरकार के पास बकाया याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2009 से उनकी आयु के अनुसार पेंशन के स्लैब में वृद्धि नहीं की गई। उनका लगभग 24,53,438 रुपए का एरियर (बकाया) सरकार के पास लंबित है। याचिकाकर्ता ने वर्ष 2009 से अब तक का कुल बकाया करीब 25 लाख रुपए 18% ब्याज के साथ दिलवाने की गुहार की।