राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से कथित फर्जी पत्र वायरल होने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया है। कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं की हिरासत को लेकर दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने भोपाल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) को निर्देश दिए हैं कि कार्यकर्ताओं के बयानों को शिकायत का आधार मानकर जांच की जाए। साथ ही जयपुर पुलिस के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच जारी रखें। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने कहा कि यदि तीनों कांग्रेस कार्यकर्ता कथित अवैध हिरासत के लिए मुआवजा चाहते हैं, तो वे सक्षम न्यायालय में अलग से याचिका दायर कर सकते हैं। हालांकि अदालत ने पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर की विधिवत जांच जारी रखने के आदेश भी दिए हैं। अप्रैल में हिरासत में लिए गए थे तीनों कार्यकर्ता मामला 19 और 20 अप्रैल 2026 का है। राजस्थान पुलिस ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े निखिल प्रजापति उर्फ अतुल प्रजापति, बिलाल खान और इनाम अहमद को हिरासत में लिया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि तीनों को साइबर क्राइम थाना भोपाल में अवैध रूप से दो दिन तक रखा गया और इस दौरान उन्हें किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया। सरकार ने रखा अपना पक्ष राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राजस्थान पुलिस की मौखिक सूचना पर तीनों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था और बाद में उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इसके बाद राजस्थान पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने की सूचना दी, जिसके बाद अगले दिन फिर उन्हें साइबर सेल बुलाकर राजस्थान पुलिस को सौंप दिया गया। हाईकोर्ट ने मंगवाई थी सीसीटीवी फुटेज सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित थाने की सीसीटीवी फुटेज और तीनों युवकों को अदालत में पेश करने के निर्देश दिए थे। अदालत के आदेश पर राजस्थान पुलिस ने तीनों को पेश किया। इसके बाद डिवीजन बेंच ने उनके अलग-अलग बयान दर्ज कराने के निर्देश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को दिए। तीनों युवकों ने अपने बयानों में राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस के दावों को गलत बताया। इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों की पुलिस को फटकार लगाई और पीड़ितों के बयानों की प्रति भोपाल पुलिस आयुक्त को भेजने के निर्देश दिए। शिकायत मानकर हो रही जांच अदालत के निर्देश पर पीड़ितों के बयानों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत शिकायत मानते हुए कार्रवाई शुरू की गई। अदालत को बताया गया कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विभागीय जांच भी जारी है। मुआवजे के लिए अलग याचिका दायर कर सकते हैं हाईकोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि तीनों आरोपियों को विधिवत अदालत में पेश किया जा चुका है और उन्हें जमानत भी मिल चुकी है। यदि वे कथित अवैध हिरासत के लिए मुआवजा चाहते हैं, तो इसके लिए उन्हें संबंधित न्यायालय में अलग से याचिका दायर करनी होगी। क्या था वायरल पत्र का मामला? यह मामला राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित फर्जी पत्र से जुड़ा है। वायरल पत्र में भाजपा की चुनावी रणनीति, परिसीमन, एससी-एसटी और ओबीसी प्रतिनिधित्व, विपक्षी वोटों के विभाजन तथा महिला आरक्षण जैसे विषयों को लेकर कई दावे किए गए थे। पत्र के अंत में वसुंधरा राजे के कथित हस्ताक्षर भी दर्शाए गए थे और इसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत को संबोधित बताया गया था। इसी कथित फर्जी पत्र के प्रसार को लेकर राजस्थान में मामला दर्ज किया गया था। ये खबर भी पढ़िए… भोपाल में कांग्रेस IT सेल के 3 वर्कर्स हिरासत में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एक कथित पत्र को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर MP कांग्रेस आईटी सेल के 3 कार्यकर्ता पुलिस हिरासत में हैं। इनमें निखिल, बिलाल और इनाम शामिल हैं। इसकी जानकारी कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने फेसबुक के माध्यम से दी है। पढ़ें पूरी खबर… जबलपुर हाईकोर्ट ने राजस्थान पुलिस को लगाई फटकार; कहा-आरोपियों को 29 अप्रैल को पेश करें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम से वायरल फर्जी पत्र के मामले में गिरफ्तार कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को कोर्ट में पेश न करने पर जबलपुर हाईकोर्ट ने राजस्थान पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। सोमवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और विनय सराफ की डिवीजन बेंच के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई हुई। पढ़ें पूरी खबर…