सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और लोढ़ा कमेटी की रिपोर्ट के बाद राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पाली की 44 फैक्ट्रियों की कंसेंट-टू-ऑपरेट निरस्त कर मशीनरी को सील कर दिया है। इन इकाइयों के बिजली कनेक्शन काटने के भी निर्देश दिए गए हैं। जांच में सामने आया कि अधिकांश फैक्ट्रियां न तो अपने स्तर पर इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) चला रही थीं और न ही गंदे पानी को निर्धारित पाइपलाइन के जरिए सीईटीपी तक भेज रही थीं। इसके बजाय टैंकरों के माध्यम से केमिकलयुक्त पानी का परिवहन किया जा रहा था, जो नियमों का उल्लंघन है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पाली, बालोतरा और जोधपुर में भी इकाइयों पर शिकंजा कस दिया है। ईटीपी संचालित करने वाली फैक्ट्रियों का ऑडिट किया जा रहा है। पाली में 12 सदस्यीय टीम भी पहुंच चुकी है, जो 10 अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इन फैक्ट्रियों की कंसेंट-टू-ऑपरेट निरस्त बोथरा टेक्सटाइल मिल्स, नरसिंग टेक्सटाइल मिल्स, पंकज कुमार मुंदड़ा एंड कंपनी, जीडी इंडस्ट्री, छाजेड़ टेक्सटाइल मिल्स, मैक्स इंडस्ट्री, महाबली टेक्सटाइल, पूजा ट्रेडर्स, नाहटा टेक्सटाइल इंडस्ट्री, पारस टेक्सटाइल मिल्स, मां वाकल टेक्सटाइल, कलावती फैब्रिक्स, कमला प्रिंट्स, भरत महान इंडस्ट्री, महालक्ष्मी टेक्सटाइल, नव भारत इंडस्ट्री, जय टेक्सटाइल, प्रियंका टेक्सटाइल, जेके प्रिंटर्स, भारत विजय टेक्सटाइल, एसआर प्रिटिंग वर्क्स, शंकर टेक्सटाइल इंडस्ट्री, किरण प्रोसेसिंग सेंटर, महाश्री इंडस्ट्री, वंदना प्रिंटर्स, धारीवाल इंडस्ट्री, प्रमोद फैब्रिक्स, श्रुति दुपट्टा पैलेस, शैलानी प्रिंटर्स, जयश्री इंडस्ट्री, नाहटा लेजिंग, नवरतन टेक्सटाइल मिल्स, पारस टेक्स प्रिंटर्स, मयूर फैशन, रिद्धी-सिद्धी, जावेर इंडस्ट्री, अरिहंत इपैक्स व कमल किशोर-मधुलेश कुमार शामिल हैं। 2017 से तैयारी, न पाइपलाइन बिछी, न प्लांट लगा औद्योगिक क्षेत्र में वर्ष 2017 से पाइपलाइन बिछाने की योजना पर काम शुरू हुआ था। इसके लिए फंड जुटाने की प्रक्रिया भी चली, लेकिन राशि पूरी नहीं हो सकी और पाइपलाइन नहीं बिछ पाई। इसके बाद अलग प्लांट स्थापित करने के लिए सरकार ने जमीन आवंटित की, एसपीवी का गठन किया और अनुदान भी दिया, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। सितंबर से अब तक करीब 100 फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जिससे औद्योगिक इकाइयों में हड़कंप की स्थिति है।