राजस्थान सरकार अब किसानों (काश्तकारों) को उनके खेतों तक पहुंचने के लिए रास्ता उपलब्ध करवाएगी। सरकार ने 29 अप्रैल को आदेश जारी करके सभी कलेक्टर को ऐसे मामलों में रास्ते के लिए सरकारी जमीन का आवंटन करने के लिए कहा है। ताकि किसान को अपनी जमीन तक सीधी कनेक्टिविटी मिल सके और जमीन का उपयोग हो सके। रेवेन्यू डिपार्टमेंट से जारी आदेशों के मुताबिक ये जमीन 20 फीट की चौड़ाई में आवंटित की जाएगी। आदेश के तहत अगर किसी किसान की कृषि भूमि के पास सरकारी जमीन है। उस सरकारी जमीन के कारण उस किसान को अपनी जमीन तक पहुंचने का मार्ग नहीं मिल रहा है। ऐसी स्थिति में उस सरकारी जमीन में से उस खातेदार को सड़क के लिए सरकार जमीन आवंटन करेगी। डीएलसी दर से दोगुनी रेट पर होगा आवंटन आदेशों के मुताबिक जमीन का आवंटन कृषि डीएलसी की दोगुनी दर पर किया जाएगा। 20 फीट चौड़ाई पट्टी में इस जमीन का उपयोग केवल रास्ता बनाने के लिए ही होगा। इस पर किसी भी तरह का निर्माण या अन्य उपयोग नहीं किया जाएगा। क्या होती है डीएलसी रेट सरकार जमीन की एक बाजार कीमत निर्धारित करती है। इसे जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी जिला स्तरीय समिति निर्धारित करती है। इसे डीएलसी दर कहते हैं। इसी दर पर अचल संपत्तियों यानी जमीन की रजिस्ट्री होती है। सरकार जमीनों का आवंटन भी करती है। हालांकि शहरी इलाकों में नगरीय निकाय (नगर पालिकाएं, हाउसिंग बोर्ड, यूआईटी, विकास प्राधिकरण) अपने एरिया में आरक्षित दर पर जमीनों का आवंटन करते हैं। आरक्षित दरों में विकास शुल्क भी शामिल होता है।