चिकित्सा विभाग ने पांच दिवसीय विशेष निरीक्षण अभियान में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई है। अभियान के दौरान 3.56 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं के रिकॉर्ड की जांच की गई, इनमें 37558 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाएं) चिन्हित हुईं। इन महिलाओं की अब नियमित निगरानी की जाएगी, ताकि समय रहते इलाज और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सके। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में 15 जुलाई से शुरू हुए इस अभियान के तहत प्रदेशभर में गर्भवती महिलाओं को समयबद्ध प्रसवपूर्व जांच (एएनसी), आवश्यक जांच, उपचार और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने पर विशेष फोकस किया गया। हाई रिस्क गर्भवतियों पर रहेगा विशेष फोकस प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया- अभियान में चिन्हित सभी हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की निगरानी के लिए संबंधित एएनएम को हर तीसरे दिन घर जाकर स्वास्थ्य जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की जटिलता समय रहते पकड़ में आ जाए और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत रेफर कर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। उन 14836 गर्भवती महिलाओं का रियल-टाइम सत्यापन और साक्षात्कार भी किया गया। इस दौरान जहां कहीं भी स्वास्थ्य सेवाओं में कमी मिली, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। 8400 से ज्यादा अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण अभियान के दौरान चिकित्सा विभाग ने केवल गर्भवती महिलाओं की ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्था का भी व्यापक मूल्यांकन किया। प्रदेशभर में 8,414 स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण कर दवाओं की उपलब्धता, जांच सेवाएं, उपकरणों की कार्यशीलता, साफ-सफाई और सेवा गुणवत्ता की समीक्षा की गई। इसके अलावा 7731 एमसीएचएन (मदर एंड चाइल्ड हेल्थ एंड न्यूट्रिशन) सत्रों की मॉनिटरिंग की गई, ताकि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। 18 जुलाई को आयोजित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत पूरे प्रदेश में 3062 विशेष सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 1 लाख 5629 गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इनमें 31919 महिलाएं पहली तिमाही, 36706 महिलाएं दूसरी तिमाही, 37004 महिलाएं तीसरी तिमाही की गर्भवती थीं। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया को मातृ मृत्यु का एक प्रमुख कारण मानते हुए इस अभियान में बड़े स्तर पर जांच और उपचार किया गया। 98247 महिलाओं की रक्त जांच की गई। 12173 महिलाओं को आयरन सुक्रोज इंजेक्शन लगाए गए। 9284 महिलाओं को एफसीएम (फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज) इंजेक्शन दिए गए। 16,634 महिलाओं को निःशुल्क सोनोग्राफी के लिए 'मा वाउचर' उपलब्ध कराए गए।