राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण (रेट) के ऑर्डर में हेराफेरी से जुड़े मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने डीओपी सचिव को जांच के आदेश दिए हैं। जस्टिस रवि चिरानिया की अदालत ने कार्मिक विभाग के सचिव को कहा है कि वह पूरे मामले की जांच करते हुए विशेष रूप से रेट रजिस्ट्रार द्वारा पेश शपथ पत्र की भी जांच करें। अदालत ने कहा- रेट रजिस्ट्रार ने ऑर्डर में हेराफेरी के लिए एक क्लर्क को जिम्मेदार ठहराया है। लेकिन जिस क्लर्क की गलती बताई गई है, उसका नाम तक शपथ पत्र में नहीं बताया गया है। ऐसे में यह जवाब संतोषजनक प्रतीत नहीं होता हैं। ऐसे में डीओपी सेक्रेटरी इस बात की भी जांच करें कि क्या संबंधित क्लर्क की वास्तव में इसमें गलती है या फिर उसे बलि का बकरा बनाया गया है। अदालत ने कहा कि अगर रेट रजिस्ट्रार का आचरण कोर्ट को दी गई सूचना के विपरीत पाया जाता है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। अदालत ने जांच रिपोर्ट 18 मई तक पेश करने के आदेश दिए। कोर्ट ने श्रवण लाल खोरवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए। ओपन कोर्ट में स्टे, ऑर्डर देने से किया मना वकील युवराज सामंत ने बताया कि पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने रेट की कार्यशैली को लेकर हमारे द्वारा लगाए गए आरोपों पर रजिस्ट्रार से स्पष्टीकरण मांगा था। हमने कोर्ट को बताया कि ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान न्याय प्रक्रिया के साथ गंभीर खिलवाड़ हुआ है। रेट ने ओपन कोर्ट में याचिकाकर्ता के पक्ष में स्टे दिया और बाद में किसी ओर दिन की सुनवाई दिखाते हुए स्टे ऑर्डर देने से मना कर दिया। केस लिस्ट हुए बिना आदेश कैसे उन्होने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को जुलाई 2026 में व्याख्याता पद पर पदोन्नति दी गई थी। लेकिन जून 2025 में सरकार ने उनकी पदोन्नति को रद्द कर दिया, जिसे उन्होंने रेट में चुनौती दी। रेट ने 15 जुलाई 2025 को सुनवाई के बाद पदोन्नति रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी। ट्रिब्यूनल की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उस समय स्टे ग्रांट होना बताया गया। लेकिन याचिकाकर्ता को तब धक्का लगा, जब उसे लिखित आदेश मिला। यह आदेश 8 अगस्त 2025 का था, जिसमें स्टे देने से मना कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में तथ्य पेश करते हुए कहा- 8 अगस्त को उसका मामला ट्रिब्यूनल में लिस्ट ही नहीं था। फिर रेट ने इस दिन का आदेश कैसे दे दिया। इस आदेश को अवैध और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए हाईकोर्ट से इसे रद्द करने की अपील की है। -------------- ये खबर भी पढ़िए… रेट पर ऑर्डर में हेराफेरी करने का आरोप, हाईकोर्ट गंभीर:रजिस्ट्रार से मांगा शपथ पत्र, खुली अदालत में आदेश कुछ, फाइल पर कुछ ओर राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण (रेट) की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की हैं। जस्टिस आनंद शर्मा की बैंच ने रेट की कार्यशैली को लेकर लगाए गए आरोपों पर रजिस्ट्रार से स्पष्टीकरण मांगा हैं। (पूरी खबर पढ़ें…)