राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने टोंक से जुड़े अनुकंपा नियुक्ति के मामले में फैसला सुनाते हुए दत्तक पुत्र को भी अनुकंपा नियुक्ति का पूरा हकदार माना है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया है कि दिवंगत सरकारी सेवक द्वारा कानूनी रूप से गोद लिया गया पुत्र (दत्तक पुत्र) भी अनुकंपा नियुक्ति का पूरा हकदार है। इसके साथ ही बिना किसी ठोस कारण के अनुकंपा नौकरी के लिए किए गए आवेदन को निरस्त करने के कारण राज्य सरकार पर एक लाख रुपए का भारी जुर्माना भी लगाया | यह निर्णय सप्ताह भर पहले जुलाई को अश्वनी गुर्जर की ओर से एडवोकेट अक्षय यादव के माध्यम से पेश की गई याचिका पर सुनाया है। याचिकाकर्ता ने मंगलवार को टोंक एसपी रोशन मीना को हाईकोर्ट के आदेश की पालना में अनुकंपा नौकरी देने की मांग की है। याचिका में कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता के पिता हेड कॉन्स्टेबल जय हनुमान का सेवाकाल के दौरान निधन हो गया था। याचिकाकर्ता अपने पिता जय हनुमान का कानूनी रूप से गोद लिया हुआ बेटा है। अक्षय यादव ने कोर्ट को यह भी बताया कि पुलिस महानिदेशक कार्यालय जयपुर ने बिना कोई स्पष्ट और विशिष्ट कारण बताए याचिकाकर्ता के अनुकंपा नियुक्ति के दावे को पूरी तरह से गैर-कानूनी तरीके से खारिज कर दिया, जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। याचिकाकर्ता ने मंगलवार को टोंक एसपी रोशन मीना को हाईकोर्ट के आदेश की पालना में अनुकंपा नौकरी देने की मांग की है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता दिवंगत सरकारी कर्मचारी का कानूनी रूप से गोद लिया गया बेटा है, इसलिए वह अपने पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति पाने का हकदार है। दत्तक पुत्र में चाचा एडवोकेट राजकिशोर गुर्जर ने बताया कि न्यायाधीश का यह ऐतिहासिक फैसला है। अब सरकार को जल्द अश्वनी को सरकारी नौकरी देनी चाहिए।