राजस्थान हाईकोर्ट ने जमीन अधिग्रहण के करीब 12 साल पुराने मामले में याचिकाकर्ता को अपनी गवाही पेश करने का अंतिम अवसर दिया है। जस्टिस अनूप कुमार ढंढ की अदालत ने याचिकाकर्ता परमिला गुप्ता को यह अंतिम मौका सार्वजनिक स्थान पर 25 पेड़ लगाने की शर्त पर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि पेड़ लगाने के बाद उनकी तस्वीरें और उनकी देखभाल करने का लिखित आश्वासन निचली अदालत में जमा कराना होगा। इसके अलावा मामले की सुनवाई पूरी होने तक हर छह महीने में उन पेड़ों की स्थिति और उनकी ताजा तस्वीरों को भी अदालत में पेश करना होगा। हाईकोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिए कि अगर याचिकाकर्ता शर्त को पूरी करता है तो उसकी गवाही दर्ज की जाए। 10 हजार रुपए भी जमा कराने होंगे इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता पर एक अन्य शर्त भी लगाई है, जिसके तहत याचिकाकर्ता को 15 दिन में 10 हजार रुपए ‘राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर’ के ‘जूनियर एडवोकेट्स वेलफेयर फंड फॉर परचेजिंग ऑफ लॉ बुक्स’ में जमा कराने होंगे। इस राशि का उपयोग 5 साल से कम प्रैक्टिस वाले युवा वकीलों के लिए कानून की किताबें उपलब्ध कराने में किया जाएगा। सिविल कोर्ट ने गवाही बंद कर दी थी यह पूरा कानूनी विवाद याचिकाकर्ता परमिला गुप्ता की जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता ने अपनी जमीन के अधिग्रहण के बाद साल 2014 में जयपुर के सीनियर सिविल जज के समक्ष मुआवजा और अन्य दावों को लेकर रेफरेंस आवेदन दायर किया था। इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा उन्हें साक्ष्य और गवाही पेश करने के कई अवसर दिए गए थे, लेकिन वह निर्धारित समय पर अपनी गवाही दर्ज नहीं करा सकीं। इसके चलते निचली अदालत ने 17 सितंबर 2019 को उनकी गवाही का अधिकार बंद कर दिया था। ये भी पढ़ें… बहू की सैलरी से 25% सास को मिलेगा:हाईकोर्ट ने बिजली निगम को दिए कटौती के आदेश; अनुकंपा नियुक्ति के बाद कर ली दूसरी शादी पति की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति पाने वाली पत्नी (बहू) की सैलरी से 25 प्रतिशत राशि सास के बैंक अकाउंट में जमा की जाए। राजस्थान हाईकोर्ट (जयपुर) के जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) को यह आदेश सास-ससुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। (पूरी खबर पढ़ें)