प्रदेश में मेडिकल सर्विस और स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स के रिक्त पदों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। दरअसल, हाल ही प्रदेश में प्रसूताओं की मौतें सामने आ रहे हैं। ऐसे में कोर्ट की यह सख्ती महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दरअसल, निरामया ट्रस्ट की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वीकृत, कार्यरत और रिक्त पदों से जुड़े आंकड़ों का अवलोकन किया। कोर्ट ने कहा- यदि प्रस्तुत आंकड़े सही हैं तो विशेषज्ञ चिकित्सकों के इतने बड़े स्तर पर पद रिक्त होना सीधे तौर पर आमजन के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। कोर्ट ने आंकड़ों का वेरिफिकेशन के लिए कहा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इन आंकड़ों का वेरिफिकेशन करने को कहा। साथ ही यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि लंबे समय से स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के पद खाली क्यों है? याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि स्त्री एवं प्रसूति रोग, एनेस्थीसिया, मेडिसिन, शिशु रोग, रेडियोलॉजी, अस्थि रोग, नेत्र रोग और ईएनटी सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। इसका सीधा असर विशेष रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, उप जिला अस्पतालों और जिला अस्पतालों की सेवाओं पर पड़ रहा है। विशेषज्ञ इलाज के अभाव में गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें हायर सेंटर पर रेफर करना पड़ रहा है। ट्रस्ट ने रिक्त जूनियर विशेषज्ञ चिकित्सकों के पदों पर जल्द सीधी भर्ती शुरू करने के निर्देश देने की मांग की। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।