राजस्थान हाईकोर्ट ने नशीली दवाओं के स्टॉक रखने के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा सस्पेंड करते हुए पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। जस्टिस अनिल उपमन की अदालत ने कहा कि पूरे मामले में जिस कांस्टेबल की सूचना पर कार्रवाई करना बताया गया है, वो कार्रवाई के समय घटना स्थल पर मौजूद था। वहीं उसी कांस्टेबल को ठीक उसी समय दूसरी जगह हुई कार्रवाई में भी उपस्थित होना पाया गया हैं। ऐसे में एक समय में एक ही पुलिसकर्मी दो अलग-अलग जगह की कार्रवाई में कैसे उपस्थित हो सकता हैं। अदालत ने कहा कि यह मानवीय रूप से तो संभव नहीं हैं। अदालत ने कहा कि इस मामले में जब्ती की कार्रवाई 6 बजकर 40 पर की गई, जबकि घटनास्थल से 8 किलोमीटर दूर दूसरे मामले में जब्ती की कार्रवाई 7 बजकर 10 मिनट पर की गई। कोर्ट ने आरोपी की सजा को निलंबित करते हुए डीजीपी से कहा है कि वह पूरे मामले में स्वतंत्र जांच करके तीन माह में रिपोर्ट पेश करें। अदालत ने यह आदेश आरोपी कमल रामचंदानी के सजा स्थगन के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए दिए। मजिस्ट्रेट के समक्ष नहीं लिए नमूने आरोपी के अधिवक्ता शांतनु बंसल ने अदालत को बताया कि पुलिस के अनुसार कांस्टेबल गिरधारी लाल की सूचना पर मुरलीपुरा थाना पुलिस ने 31 जनवरी 2022 को मुरलीपुरा स्कीम सर्किल पर स्थित कमल मेडिकल एंड प्रोविजनल स्टोर पर कार्रवाई करते हुए नशीली दवाओं का स्टॉक बरामद किया। आरोपी के पास इन दवाओं के संबंध में खरीद का बिल और कोई बाउचर नहीं मिला। जिसके बाद आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया। लेकिन इस पूरे मामले में कानून प्रवाधानों का पालन नहीं किया गया। जब्ती के बाद अगले दिन 1 फरवरी को पुलिस ने नमूने एफएसएल को भेज दिए। जबकि एनडीपीएस एक्ट में मजिस्ट्रेट के सामने ही नमूने लेने का प्रावधान हैं। वहीं जब्ती की कार्रवाई भी इंस्पेक्टर अथवा सब इंस्पेक्टर स्तर के पुलिस अधिकारी के द्वारा ही की जा सकती हैं। लेकिन इस मामले में मौके पर पहुंची औषधि नियंत्रण अधिकारी अरूणा मीणा ने अपने बयानों में कहा है कि उनके घटनास्थल पर पहुंचने से पहले ही दवाओं की बरामदगी हो चुकी थी, यह बरामदगी कांस्टेबल गिरधारी लाल द्वारा की गई थी।