राजस्थान हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद पांचना बांध के पानी को लेकर चल रहे विवाद में जल संसाधन विभाग सक्रिय हो गया है। हाईकोर्ट ने विभाग को 3 सप्ताह के भीतर नहरों में पानी छोड़ने का आदेश दिया है। इसके बाद विभागीय अधिकारियों की विशेष तैनाती की गई है और नहरों की सफाई व मरम्मत का काम तेज कर दिया गया है। बांध और नहरी क्षेत्र का निरीक्षण जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता शनिवार को करौली पहुंचे। उन्होंने पांचना बांध और नहरी क्षेत्र का निरीक्षण किया। कई स्थानों पर नहरों में मिट्टी भराव और क्षतिग्रस्त हिस्सों को देखकर उन्होंने अधिकारियों को तत्काल मरम्मत और सफाई के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने पांचना बांध से लेकर सवाईमाधोपुर जिले के वजीरपुर उपखंड के कुंसाय गांव तक नहरों का जायजा लिया। निगरानी के लिए किया गया तैनात यह निर्देश गंगापुर सिटी विधायक और ग्रामोत्थान संस्था द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिए गए हैं। हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद विभाग ने गंगापुर, दौसा, जयपुर, लालसोट, बाड़ी और मनिया सहित विभिन्न क्षेत्रों से अधिशासी एवं सहायक अभियंताओं को अस्थायी रूप से पांचना बांध और नहरों की निगरानी के लिए तैनात किया है। पांचना बांध से करौली और सवाईमाधोपुर जिले के 35 गांवों की लगभग 9985 हेक्टेयर भूमि सिंचित की जानी है। हालांकि, पानी के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के कारण वर्ष 2005 के बाद से नहरों में सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा जा सका है। 39 गांवों की पानी की मांग विवाद की मुख्य वजह बांध के पास बसे 39 गांवों की पानी की मांग है। इन गांवों के किसानों का तर्क है कि बांध निर्माण में उनकी जमीन का अधिग्रहण किया गया था, इसलिए उन्हें पहले पानी मिलना चाहिए। दूसरी ओर, कमांड क्षेत्र के किसान वर्षों से नहरों में पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने गुड़ला-पांचना लिफ्ट परियोजना भी शुरू की थी, लेकिन स्थानीय किसानों का आरोप है कि इससे सभी गांवों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है।