भजनलाल सरकार ने 12 दिन में दूसरी बार ब्यूरोक्रेसी में फेरबदल किया है। मंगलवार (31 मार्च) रात को 65 और आईएएस के तबादले किए गए हैं। इस तबादला सूची से दो संकेत मिल रहे हैं। पहला- नेताओं- जनप्रतिनिधियों से उलझने वाले अफसरों को इधर उधर किया गया है। दूसरा- काम करने वाले अफसरों को प्राइम पोस्टिंग दी गई है। उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत से टकराने वाली प्रतापगढ़ जिला कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया का तबादला कर दिया है। जैसलमेर कलेक्टर का भी RAS एसोसिएशन के विरोध के बाद तबादला सूची में नाम सामने आया है। हालांकि, सरकार में वनमंत्री संजय शर्मा से उलझने वाले सीकर कलेक्टर मुकुल शर्मा का कद बढ़ा है। उन्हें विशिष्ट सचिव, मुख्यमंत्री बनाया गया है। इससे पहले सरकार ने राज्य सरकार ने 19 मार्च को 25 आईएएस अफसरों के तबादले किए थे। क्या राजस्थान में ब्यूरोक्रेसी हावी हो रही है? आखिर क्यों बार-बार जनप्रतिनिधि और अफसरों में टकराव की स्थिति बन रही है? दैनिक भास्कर डिजिटल पर पढ़िए पूरा एनालिसिस... 1. उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत और कलेक्टर अंजलि राजोरिया विवाद राजस्थान में उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत और प्रतापगढ़ की जिला कलेक्टर रहीं अंजलि राजोरिया के बीच विवाद संसद तक पहुंच गया था। सांसद रावत ने 28 मार्च को शून्यकाल के दौरान प्रतापगढ़ की जिला कलेक्टर अंजलि राजोरिया के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। अब अंजलि राजोरिया को कलेक्टर से तबादला कर गृह विभाग में संयुक्त सचिव की पोस्टिंग दी गई है। वहीं, शुभम चौधरी को उनकी जगह प्रतापगढ़ का नया कलेक्टर लगाया गया है। विवाद की वजह क्या थी? सांसद का आरोप है कि कलेक्टर ने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन के तहत स्वीकृत कार्यों को जानबूझकर रोककर रखा। एक बैठक में शिक्षा, पानी और ग्रामीण विकास सहित 54 विकास कार्यों की स्वीकृति दी गई। इन सभी कार्यों के लिए सरकार ने वित्तीय स्वीकृति भी दे दी थी। लेकिन इसके बावजूद प्रतापगढ़ की कलेक्टर ने सिर्फ 3 कार्यों को ही आगे बढ़ाया। सांसद का यह भी कहना है कि यह निर्णय प्रशासनिक विवेक के बजाय व्यक्तिगत अहंकार के चलते लिया गया। इससे प्रधानमंत्री के विकास विजन को नुकसान पहुंचता है। इससे पहले 8 दिसंबर, 2025 को सांसद और कलेक्टर के बीच विवाद हुआ था। सांसद बोले : अफसरों को सरकार के निर्देशों का पालन करना ही होगा। मुख्य सचिव को भी लेटर लिखा था। मामला संसद में भी उठाया गया। हम सिर्फ विकास चाहते हैं। इस मुद्दे पर IAS अंजलि राजोरिया ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। 2. वन मंत्री संजय शर्मा और IAS मुकुल शर्मा विवाद 23 दिसंबर 2025 को वन मंत्री संजय शर्मा सीकर कलेक्टर मुकुल शर्मा से नाराज हो गए थे। दरअसल, प्रभारी मंत्री संजय शर्मा अलसुबह शहरी सेवा शिविर में पहुंचे तो कर्मचारियों की खाली कुर्सियां देखकर भड़क गए। एक्सईन साइड में खड़ी होकर स्ट्रीट लाइट संबंधी सॉफ्ट कॉपी ढूंढने लगीं। प्रभारी मंत्री ने शिविर के कार्यों के बारे में RO महेश योगी को पूछा तो मोबाइल में सूची दिखाने पर गुस्सा हो गए। जब जिला कलेक्टर नगर परिषद अफसरों के पक्ष में उतरे, तो मंत्री ने कहा- इन चोरों को प्रोटेक्शन देने की जरूरत नहीं है…कलेक्टर साहब। आपकी मर्जी हो उस तरह से इस सीकर जिले को और यहां के सेवा शिविरों को चलाइए, मैं जा रहा हूं। इसके बाद मंत्री नाराज होकर जयपुर के लिए निकल गए थे। इस विवाद के करीब 3 महीने बाद मुकुल शर्मा को सीकर कलेक्टर से तबादला किया है। हालांकि, उन्हें मुख्यमंत्री की टीम में एंट्री मिली है। 3. जैसलमेर कलेक्टर पर गिरी गाज, RAS एसोसिएशन ने खोला था मोर्चा राज्य सरकार ने जैसलमेर के कलेक्टर प्रताप सिंह को हटा दिया है। प्रताप सिंह को अब सचिवालय में संयुक्त शासन सचिव, वित्त व्यय विभाग में लगाया है। वहीं, अनुपमा जोरवाल को जैसलमेर का कलेक्टर बनाया गया है। जोरवाल का राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा अभियान के पद पर कार्यरत थीं। विवाद क्या था? राजस्थान प्रशासनिक सेवा यानी आरएएस एसोसिएशन ने कलेक्टर पर आरएएस अफसरों के साथ अशोभनीय व्यवहार करने और नियमों के खिलाफ जाकर काम का दबाव बनाने सहित कई आरोप लगाए थे। एसोसिएशन ने सीएम भजनलाल शर्मा को चिट्ठी लिखकर कलेक्टर को पद से हटाने और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की थी। चिट्ठी में लिखा था- पोकरण SDM रहे प्रभजोत सिंह गिल ने 2 मामलों में कलेक्टर पर सूदखोर के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने और सोलर कंपनी का फेवर लेने के आरोप लगाए थे। एसोसिएशन ने गिल का डीओपी को लिखा लेटर भी साथ लगाया है। एसोसिएशन का आरोप था कि जैसलमेर कलेक्टर प्रताप सिंह का रवैया गिल के खिलाफ शुरू से ही नकारात्मक रहा था। गिल को 8 मई 2025 को मूंडवा (नागौर) SDM के पद पर पोस्टिंग दी गई। इससे पहले वे पोकरण SDM के पद पर थे। 4. आशीष मोदी के आदेश पर हुआ था विवाद आशीष मोदी को निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से हटाकर जिला कलेक्टर सीकर लगाया गया है। विभाग ने 9 अक्टूबर को एक आदेश दिया था। इसमें 24 हजार से ज्यादा सालाना बिजली बिल भरने वाले 3 लाख पेंशन लाभार्थियों को नोटिस जारी किया था। उनकी आय की गहराई से जांच करवाने और जांच पूरी होने तक पेंशन का भुगतान रोकने के आदेश दिए थे। इससे विवाद हो गया था। मामले को शांत करने के लिए खुद मंत्री अविनाश गहलोत को स्पष्टीकरण देना पड़ा था। मंत्रियों और अफसरों में क्यों होता है टकराव? वजह जानिए एक्सपर्ट का कहना है कि मंत्रियों और अफसरों में टकराव होना नया नहीं है। हर सरकार में ऐसा होता आया है। रिटायर्ड आईजी सत्यवीर सिंह का कहना है कि अधिकारी संवैधानिक दायरे में रहकर ही काम कर सकता है। जब किसी अफसर से पर ऊपर से दबाव आता है तो वह काम करने से इनकार कर देता है। यहीं से विवाद शुरू हो जाता है। उनका कहना है जनप्रतिनिधियों की हर पांच साल बाद चुनाव में जाना होता है। ऐसे में उनकी जबावदेही ज्यादा होती है। एक्सपर्ट के मुताबिक-मंत्री चाहते हैं कि उनके मनपसंद अफसर नियुक्त किए जाएं, ताकि विभाग में उनकी पकड़ मजबूत हो।अफसर ऐसा होने नहीं दे रहे हैं। इसी से विवाद बढ़ रहा है। टकराव के पीछे अफसरशाही की मनमानी भी एक बड़ी वजह है। गहलोत सरकार में हुए थे विवाद एक्सपर्ट का कहना है कि मंत्रियों और अफसरों के बीच विवाद कोई नई बात नहीं है। किसी भी दल की सरकार रही हो, विवाद होते रहे हैं। पिछली गहलोत सरकार के समय कृषि मंत्री रहे लालचंद कटारिया का आईएएस दिनेश कुमार और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का राजेश्वर सिंह से विवाद चर्चा में रहा था। इसी प्रकार तत्कालीन खेलमंत्री अशोक चांदना और सीएम के ओएसडी कुलदीप रांका का विवाद भी काफी सुर्खियों में रहा था। हालांकि, बाद में सीएम अशोक गहलोत के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया था। …. IAS के ट्रांसफर से जुड़ ये खबर भी पढ़िए… IAS डाबी बहनों का ट्रांसफर, मुख्यमंत्री ऑफिस में बड़ा फेरबदल:रातों-रात बदले 25 जिलों के कलेक्टर, मंत्री से उलझने वाले IAS को हटाया राजस्थान सरकार ने मंगलवार रात 65 IAS अफसरों के तबादले कर दिए। मुख्यमंत्री कार्यालय में बड़ा फेरबदल हुआ। कई नए अफसरों की एंट्री हुई। वहीं, 25 जिलों के कलेक्टर भी बदले गए हैं…(CLICK कर पढ़ें)