राजस्थान पुलिस सेवा की अधिकारी एवं आरएसी थर्ड बटालियन, बीकानेर में कमांडेंट सीमा हिंगोनिया की पुस्तक 'सुरक्षा सखी' का विमोचन झालाना ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट, जयपुर में हुआ। पुस्तक 'सुरक्षा सखी' में महिलाओं के आधुनिक दौर के मुद्दों को कहानियों के जरिए उठाया गया है और उनके व्यावहारिक समाधान भी विस्तार से बताए गए हैं। कार्यक्रम में जयपुर सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने हिस्सा लिया और महिला-संबंधी मुद्दों पर अपने अनुभव व विचार साझा किए। 'सुरक्षा सखी' महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लिखी गई एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका है। पुस्तक में कहानियों, कानूनों, संवाद, प्रश्नोत्तरी और केस-स्टडी के माध्यम से महिलाओं की समस्याओं और उनके कानूनी समाधान को सरल भाषा में समझाया गया है। हर महिला तक कानून जानकारी पहुंचाना 'सुरक्षा सखी' का मकसद सीमा हिंगोनिया ने कहा कि 15 वर्ष की पुलिस सेवा के दौरान मैंने महिलाओं को घरेलू हिंसा, साइबर क्राइम, दहेज उत्पीड़न जैसे अपराध झेलते देखा है। 'सुरक्षा सखी' का मकसद हर महिला तक कानून, न्याय और मदद की सही जानकारी पहुंचाना है, ताकि वो घर बैठे अपनी आवाज उठा सके। यह पुस्तक सिर्फ महिलाओं को जागरूक नहीं करती, बल्कि पुरुषों की सोच बदलने का भी प्रयास कर रही है। कार्यक्रम में राजभाषा मंत्रालय की केंद्रीय हिंदी समिति की पूर्व सदस्य डॉ. रमा सिंह मुख्य अतिथि और राजस्थान राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. लाड कुमारी जैन विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुई। पुलिस की साफ-सुथरी छवि भी सामने लाएगी किताब प्रो. लाड कुमारी जैन ने कहा कि आज महिलाओं के लिए कई कानून बने हैं, लेकिन कई मामलों में महिलाएं खुद ही पीछे हट जाती है। सीमा हिंगोनिया की यह किताब पुलिस की साफ-सुथरी छवि भी सामने लाएगी, जो अपने अनुभवों से महिलाओं की जिंदगी बदलेगी। महिलाओं के लिए भरोसेमंद साथी की तरह है ‘सुरक्षा सखी’ सीमा हिंगोनिया ने बताया कि ‘सुरक्षा सखी’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए एक भरोसेमंद साथी की तरह है, जो उन्हें घर बैठे उनके अधिकार, कानून, पुलिस व्यवस्था और न्याय प्रणाली की जानकारी देती है। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा के 15 वर्षों के दौरान उन्होंने लगातार यह महसूस किया कि पीड़ित महिलाएं, अपराध पीड़ित और जरूरतमंद लोग न्याय की जटिल प्रक्रियाओं, कानूनी भाषा और पुलिस तंत्र की पेचीदगियों के कारण अक्सर न्याय मिलने से पहले ही हताश हो जाते हैं। विशेष रूप से महिलाओं के लिए यह राह और भी कठिन हो जाती है। उन्होंने बताया कि समाज में बड़ी संख्या में महिलाएं घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, बाल विवाह, भ्रूण हत्या, डायन प्रथा और मानसिक प्रताड़ना जैसे अपराधों का सामना करती हैं, लेकिन कानूनी जानकारी के अभाव में वे समय रहते अपनी आवाज नहीं उठा पातीं। कई बार अपराध और हिंसा से मुक्ति पाने के लिए घर से निकलने, थाने और अदालत तक पहुंचने की जटिलता उन्हें संघर्ष से पहले ही पीछे हटने को मजबूर कर देती है। परिणामस्वरूप वे हिंसा और घुटन भरी जिंदगी को ही अपना भाग्य मानकर सहन करती रहती हैं। कानूनों के बारे में जानकारी देना पुस्तक का उद्देश्य हिंगोनिया ने बताया कि इस पुस्तक का उद्देश्य महिलाओं को यह बताना है कि उनके लिए कौन-कौन से कानून बने हैं, वे अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग कैसे कर सकती हैं, पुलिस और न्याय व्यवस्था उनके लिए कैसे काम करती है और जरूरत पड़ने पर किस संस्था, हेल्पलाइन या महिला सहायता केंद्र से संपर्क किया जा सकता है। पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें कानूनों को केवल धाराओं और नियमों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन से जुड़ी 15 संवेदनशील कहानियों के माध्यम से समझाया गया है। ये कहानियां महिलाओं और बच्चों से जुड़े उन सामाजिक और कानूनी विषयों पर आधारित हैं, जो हमारे आसपास घटित होते रहते हैं। जैसे बालिका भ्रूण हत्या, बाल विवाह, यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, डायन प्रथा और अन्य सामाजिक अपराध शामिल है। पुस्तक में राजस्थान पुलिस की विभिन्न हेल्पलाइन, महिला थानों, महिला यूनिट्स, हेल्प डेस्क और राज्य के महिला एवं बाल अधिकारों से जुड़े विभागों की विस्तृत जानकारी भी दी गई है। साथ ही इनसे जुड़े संपर्क सूत्र भी शामिल किए गए हैं, ताकि महिलाएं घर बैठे आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकें और न्याय की दिशा में पहला कदम बढ़ा सकें। पुरुषों की सोच में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल सीमा हिंगोनिया ने कहा कि यह पुस्तक केवल महिलाओं को जागरूक करने का प्रयास नहीं है, बल्कि पुरुषों की सोच में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। उनका कहना है कि समाज में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान की भावना विकसित किए बिना किसी भी कानूनी व्यवस्था का उद्देश्य पूर्ण नहीं हो सकता।