राजस्थान में 960 करोड़ के जल जीवन मिशन (जेजेएम) के बड़े आरोपी पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को ACB ने गिरफ्तार कर लिया है। IAS सुबोध अग्रवाल का 31 दिसंबर, 2025 को रिटायरमेंट था, इससे ठीक पहले भजनलाल सरकार ने मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी थी। पिछले महीने ही 13 मार्च को ACB कोर्ट ने अग्रवाल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया था। 17 फरवरी से अग्रवाल का फोन बंद हो गया था। अग्रवाल को पकड़ने के लिए ACB की टीमें अलग-अलग शहरों-प्रदेशों में छापे मार रही थीं। सुबोध अग्रवाल अब ACB की गिरफ्त में है। पूछताछ में इस घोटाले से जुड़े कई सवालों के जवाब देने होंगे… 1. शिकायत आई फिर क्यों नहीं रोके ठेके? आरोप : सुबोध अग्रवाल को पद पर रहते शिकायत मिल गई थी कि श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी को फर्जी दस्तावेज के आधार पर काम दिया जा रहा है। शिकायत में साफ था कि कंपनियों द्वारा लगाए गए अनुभव संबंधी सर्टिफिकेट फर्जी हैं। इसके बावजूद 2023 में पीएचईडी (जलदाय विभाग) की वित्तीय समिति ने टेंडर पास कर दिए। कंपनी को करोड़ों के काम करने की स्वीकृति दे दी। ACB की FIR के अनुसार फर्जी दस्तावेज के आधार पर श्री गणपति ट्यूबवेल ने 68 और श्री श्याम ट्यूबवेल ने 169 टेंडर भरे। 2. फर्जी सर्टिफिकेट का मामला दबाया क्यों? 3. इरकॉन ने खुद चिट्ठी भेजी, एक्शन क्यों नहीं? 4. विशाल सक्सेना ने क्यों लिया अग्रवाल का नाम? आरोप : ACB सूत्रों के अनुसार इरकॉन के कामों और सर्टिफिकेट की जांच के लिए भेजे गए विशाल सक्सेना ने अपने बयान में कहा है कि उसे सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन की पॉजिटिव रिपोर्ट देने के लिए आला अधिकारियों ने कहा था। उसने अपने बयानों में सुबोध अग्रवाल का नाम भी लिया है। सूत्रों के अनुसार ACB ये सवाल सुबोध अग्रवाल से पूछेगी कि विशाल सक्सेना पर क्या कोई दवाब डाला था। 5. फर्जी कागजातों के आधार पर दोनों कम्पनियों को ठेके देने की मंजूरी क्यों दी? आरोप : ACB जांच के अनुसार सुबोध अग्रवाल जेजेएम के कामों के लिए ठेके देने वाली कमेटी में प्रमुख था। ऐसे में सवाल है कि फर्जी कागजातों के आधार पर दोनों कम्पनियों को ठेके देने की मंजूरी क्यों दी गई? क्या मिलीभगत और रिश्वत के खेल में अग्रवाल शामिल रहा? जिन कम्पनियों की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, उन्हें ठेके देने में प्रमुख भूमिका अग्रवाल ने किस फायदे के लिए निभाई? सुबोध अग्रवाल बड़ी कड़ी सुबोध अग्रवाल 16 मई 2023 से 12 जनवरी 2024 तक जलदाय विभाग के एसीएस रहे थे। ACB सूत्रों के अनुसार शुरुआती जांच में साफ हो गया है कि दो निजी कम्पनियों श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी को जेजेएम के ठेके देकर काम के बदले सरकारी अधिकारियों ने कमीशन लिया, जिसमें मुकेश पाठक, संजय बड़ाया सहित 5 बिचौलियों की भूमिका भी सामने आई। अग्रवाल ने FIR को दी हाईकोर्ट में दी थी चुनौती सुबोध अग्रवाल ने फरवरी में FIR को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और रद्द करने की गुहार की। अभी हाईकोर्ट में सुनवाई होनी बाकी है। याचिका में कहा है कि 95 प्रतिशत कार्यादेश उनसे पहले पद पर रहे तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधांश पंत के समय बनी वित्त समिति ने स्वीकृत किए थे, जबकि मेरे (सुबोध अग्रवाल) कार्यकाल में स्वीकृत टेंडरों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से भी कम थी। अग्रवाल ने याचिका में जांच एजेंसी पर पक्षपात के आरोप लगाए हैं। उन्होंने ये भी तर्क दिया है कि वे घोटाले के सूत्रधार नहीं हैं, बल्कि अनियमितताओं को सामने लाने वाले अधिकारी हैं। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की और संबंधित फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया। पूर्व मंत्री महेश जोशी की हुई थी गिरफ्तारी घोटाले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी सहित 5 आरोपी गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं, जोशी हाल ही जमानत पर बाहर आए हैं। जोशी के अलावा ठेकेदार पदमचंद जैन, महेश मित्तल, पीयूष जैन और संजय बड़ाया को ईडी गिरफ्तार कर चुकी है। सभी जमानत पर बाहर हैं। घोटाले में ईडी और एसीबी जांच कर रही है। 5 पॉइंट में समझें, क्या है जल जीवन मिशन घोटाला?