प्रदेश में पंचायत-निकाय चुनाव में देरी पर यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें पहले अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक समय ऐसा भी था जब 13-13 सालों तक पंचायतीराज चुनाव नहीं होते थे, इसी तरह निकाय के चुनाव भी कई सालों तक नहीं होते थे और अब वही लोग सवाल उठा रहे हैं- यह स्थिति “100 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली” जैसी है। खर्रा ने कहा कि जिस दिन राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और राज्य चुनाव आयोग अपना काम पूरा कर देंगे, हम मैदान में उतर जाएंगे और परिणाम सबके सामने आ जाएगा। मुंगेरीलाल के हसीन सपने कोई भी देख सकता हैं, इसमें कहीं कोई संवैधानिक, सामाजिक और धार्मिक प्रतिबंध नहीं हैं। चुनाव कराने के लिए 6 महीने का समय मांगा मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि हमें हाईकोर्ट से पंचायत-निकाय चुनाव कराने के लिए 6 माह का समय मांगा हैं। हमने कोर्ट को बताया है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं दी हैं। इसी बीच एसआईआर शुरु हो गया। जिसकी रिपोर्ट नहीं आई हैं। वहीं अदालती आदेश के कारण राज्य चुनाव आयोग ने पुरानी मतदाता सूची के अनुसार ही मतदाता सूचियां बनाने का कार्यक्रम जारी कर दिया। ऐसे में अब एसआईआर के आंकड़े आने पर मतदाता सूची नए सिरे से बनानी होगी, जो सटीक मतदाता सूची होगी। दो साल तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लटकाए रखा मंत्री खर्रा ने कहा कि साल 2022 में महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया था कि ओबीसी आयोग द्वारा सही आकड़े जारी होने के बाद भी पंचायत और निकाय चुनाव कराए जा सकते हैं। लेकिन कांग्रेस सरकार ने दो साल तक इस आदेश को लटकाए रखा, इस पर कोई काम नहीं किया। जब हमारी सरकार बनी तो हमने वन स्टेट वन इलेक्शन की अवधारणा पर आगे बढ़ना शुरू किया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट का आदेश हमारे संज्ञान में आया। जिसके बाद हमने ओबीसी आयोग का गठन किया।