राजस्थान में पंचायत चुनाव कब होंगे? इसको लेकर सवाल बना हुआ है। कांग्रेस आयोग पर सरकार से मिलीभगत के आरोप लगा रही है। वहीं, पूर्व कमिश्नर ने चुनाव में देरी पर सवाल उठाए है। चुनाव को लेकर सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारी और फिलहाल की स्थिति को लेकर दैनिक भास्कर ने आयुक्त राजेश्वर सिंह से खास बातचीत की। उन्होंने कहा - तय डेडलाइन 15 अप्रैल तक पंचायत चुनाव नहीं कराने के चलते राजस्थान हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को हमें अवमानना का नोटिस जारी किया था। जल्द ही कोर्ट में जवाब दाखिल करेंगे। पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल : कोर्ट के आदेश के बावजूद भी पंचायत चुनाव क्यों नहीं करा पाए? जवाब : राज्य सरकार ने ओबीसी, एससी-एसटी और महिलाओं के आरक्षण के निर्धारण की सूचना समय पर नहीं दी। इसलिए समय पर चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं कर पाए। आरक्षण की सूचना नहीं मिलने पर 9 मार्च 2026 को आयोग द्वारा सूचना उपलब्ध कराने के लिए पंचायती राज सचिव को लेटर लिखा था। आयोग के पत्र का जवाब पंचायती राज सचिव ने 31 मार्च 2026 को दिया कि आरक्षण से संबंध में मांगी गई सूचना प्रक्रियाधीन है। लेकिन इसी दिन राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल सितंबर 2026 तक के लिए बढ़ा दिया। सवाल : निकाय चुनाव क्यों नहीं करा पाए, क्या वजह रही? जवाब : पंचायतीराज संस्थाओं के मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम के साथ ही नगरीय निकायों के लिए भी कार्यक्रम की घोषणा दिनांक 31 दिसंबर 2025 को ही की जानी थी। स्वायत्त शासन विभाग ने आयोग के पत्रों का जवाब ही नहीं दिया गया। जिसकी वजह से पुनरीक्षण कार्यक्रम 31 दिसंबर 2025 को घोषित नहीं किया जा सका। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्वायत्त शासन विभाग को कुल मिलाकर 6 पत्र लिखे थे। 6 फरवरी 2026 को लिखे पत्र में यह भी लिखा गया कि यदि 3 दिन के अंदर स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती है तो कोर्ट के निर्णय से प्रभावित 196 निकायों के लिए पृथक से मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम घोषित कर दिया जाएगा। इस पत्र का भी जवाब आयोग को नहीं मिला। सवाल : पूर्व निर्वाचन ने कहा चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है, आप क्या कहेंगे? जवाब : ये सवाल तो तत्कालीन निर्वाचन आयुक्त से पूछना चाहिए, जो कि अब ये कह रहे हैं कि समय पर चुनाव कराना राज्य निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है। नवंबर, 2024 से ही नगरपालिकाओं और पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल समाप्त होना प्रांरभ हो गया था। राज्य सरकार ने प्रशासक लगाने से शुरू कर दिए थे। राज्य निर्वाचन आयोग ने उस समय कदम क्यों नहीं उठाए? तत्कालीन आयुक्त तो सितंबर 2025 तक आयुक्त के पद पर रहे थे। उन्होंने प्रशासक लगाने का विरोध क्यों नहीं किया? सरकार से चुनाव कराने की मांग क्यों नहीं की? तत्कालीन आयुक्त एक चिट्ठी भी बता दें जो सरकार को लिखी हो। हमनें चुनाव करवाने के लिए आधा दर्जन चिट्ठियां राज्य सरकार को लिखी हैं। सरकार से बार-बार कहा है कि कोर्ट के आदेश की पालना करो। यह भी लिखा है कि कोर्ट के आदेशों की पालना नहीं करने पर अवमानना के जिम्मेदार होंगे। सवाल : कोर्ट ने पंचायत-निकाय चुनाव में देरी पर राज्य निर्वाचन-आयुक्त को अवमानना नोटिस दिया है? जवाब : माननीय उच्च न्यायालय (राजस्थान हाईकोर्ट) में मेरे विरुद्ध अवमानना याचिका दाखिल की गई है। हमें नोटिस भी मिला है। जिसका जवाब संपूर्ण तथ्यों के साथ माननीय न्यायालय में निर्धारित समय में देंगे। सवाल : आपने पहले मार्च में चुनाव कराने के संकेत दिए थे, फिर कहां अड़चनें आ गई? जवाब : देखिए, पंचायत-निकाय चुनाव कराना राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की संयुक्त जिम्मेदारी है। जिसमें निकायों का गठन, पुनर्गठन और परिसीमन और एससी-एसटी, ओबीसी और महिला समुदाय के लिए पदों का आरक्षण का राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में आता है। निर्वाचक नामावली तैयार करना, चुनाव की घोषणा करना, चुनाव प्रक्रिया का निष्पक्ष ढंग से संचालन करना और आदर्श आचार संहिता की पालना करवाना आयोग की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार ने हमें विभिन्न वर्गों के लिए पदों की आरक्षण की सूचना नहीं दी तो हम चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं कर सके। चुनाव कराने की तैयारी हमने मार्च में ही शुरू कर ली थी। सवाल : कांग्रेस का आरोप है कि आयोग सरकार के दबाव में काम कर रहा है? जवाब : नो कमेंट...देखिए, चुनाव कराना संयुक्त जिम्मेदारी है। आधा काम सरकार का है। आधा काम निर्वाचन आयोग का है। संविधान ने ही सरकार को सृजित किया है। संविधान ने ही राज्य निर्वाचन आयोग को भी सृजित किया है। दोनों संवैधानिक संस्थाएं है। सब काम आपसी सहयोग से ही होता है। सवाल : अब आयोग रिपोर्ट कब तक देगा? जवाब : सरकार ने आयोग का गठन ओबीसी आरक्षण के लिए निर्धारण के लिए किया था। लेकिन आयोग काम पूरा नहीं कर पाया। ऐसे में सरकार ने आयोग का कार्यकाल बढ़ा दिया है। सरकार ने आयोग का कार्यकाल 30 सितंबर तक बढ़ा दिया है। आयोग का कार्यकाल 31 मार्च को समाप्त हो गया था। उम्मीद है कि आयोग सर्वे का काम करके सितंबर तक सरकार को रिपोर्ट सौंप देगा। राज्य निर्वाचन-आयुक्त को मिला था अवमानना नोटिस राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव में देरी को लेकर हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को राज्य चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह को अवमानना नोटिस जारी किए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा की खंडपीठ ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को नोटिस जारी किए। कोर्ट ने पूछा है कि आदेश के बाद भी निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्यक्रम तय समय सीमा से बाहर का कैसे जारी कर दिया। अदालत ने चुनाव आयोग से 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। …. राजस्थान में पंचायत चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान में पंचायत चुनाव टले तो क्या होगा?:1900 करोड़ का फंड नहीं मिलेगा, जानिए- कौन सी योजनाएं अटक जाएंगी चुनाव नहीं हुए तो इसका खामियाजा हजारों पंचायतों को भुगतना पड़ सकता है। केंद्रीय वित्त आयोग से मिलने वाला 1900 करोड़ का फंड अटक जाएगा। पूरी खबर पढ़िए…