राजस्थान सरकार ने शिक्षा और रोजगार को जोड़ने की दिशा में नई पहल शुरू की है। सत्र 2026-27 में टोंक की 14 समेत प्रदेश की 559 पीएम श्री स्कूलों में स्टूडेंट्स को पढ़ाई के साथ रोजगारपरक शिक्षा भी दी जाएगी। कक्षा 9 से 12 तक 15 से ज्यादा सेक्टर्स और जॉब रोल्स में ट्रेनिंग मिलेगी, जबकि कक्षा 6 से 8 के स्टूडेंट्स के लिए कौशल बोध कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने करोडों रुपए का बजट मंजूर किया है और स्कूलों से लेकर अधिकारियों तक की जिम्मेदारी तय की गई है। 15 से ज्यादा सेक्टर्स और जॉब रोल्स में मिलेगी ट्रेनिंग प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग और राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने पीएमश्री (व्यावसायिक शिक्षा) योजना के तहत सत्र 2026-27 में यह व्यवस्था शुरू की है। इसका उद्देश्य स्टूडेंट्स को स्कूल स्तर से ही रोजगार के लिए तैयार करना है। कक्षा 9 से 12 तक के स्टूडेंट्स को 15 से ज्यादा सेक्टर्स और जॉब रोल्स में ट्रेनिंग दी जाएगी। इनमें एग्रीकल्चर सेक्टर में डेयरी वर्कर और डेयरी फार्मर, ऑटोमोटिव सेक्टर में फोर व्हीलर सर्विस असिस्टेंट और टेक्नीशियन, आईटी और आईटीईएस सेक्टर में डेटा एंट्री ऑपरेटर और सीआरएम वॉयस, ब्यूटी एंड वेलनेस सेक्टर में ब्यूटी थेरेपिस्ट तथा अन्य सेक्टर्स में फूड प्रोसेसिंग जैसे कोर्स शामिल किए गए हैं। कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों के लिए कौशल बोध कार्यक्रम इस बार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि व्यावसायिक शिक्षा केवल बड़ी कक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगी। कक्षा 6 से 8 तक के स्टूडेंट्स के लिए कौशल बोध कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके लिए विशेष गतिविधि पुस्तिका तैयार की गई है। इसके तहत बच्चे दैनिक जीवन से जुड़े काम, मिट्टी के बर्तन बनाना, कृषि गतिविधियां, सिलाई और स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी जानकारी सीखेंगे। कौशल भारत-कुशल भारत लक्ष्य को मिलेगा बल इस योजना का मुख्य उद्देश्य कौशल भारत-कुशल भारत के लक्ष्य को जमीन पर उतारना और शिक्षा तथा रोजगार के बीच की दूरी को कम करना है। सरकार का मानना है कि सरकारी स्कूलों से निकलने वाले स्टूडेंट्स केवल डिग्री लेकर नहीं निकलें, बल्कि उनके पास ऐसा हुनर भी हो जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। गौरतलब है कि प्रदेश में पहले से 549 पीएम श्री स्कूल संचालित हैं। इनमें टोंक जिले की 14 स्कूलें भी शामिल हैं। 2026 तक 50 प्रतिशत स्टूडेंट्स को व्यावसायिक शिक्षा देने का लक्ष्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत इस योजना का ढांचा तैयार किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि साल 2026 तक स्कूल और उच्च शिक्षा प्रणाली के माध्यम से कम से कम 50 प्रतिशत स्टूडेंट्स को व्यावसायिक शिक्षा का अनुभव दिया जाए। इसके साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के सभी वर्गों के स्टूडेंट्स में ड्रॉपआउट दर कम करने और स्कूलों में उनका ठहराव बढ़ाने पर भी फोकस रहेगा। टोंक की इन 14 स्कूलों को किया गया शामिल टोंक जिले में राजकीय गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल मालपुरा, राजकीय कोठीनातमाम सीनियर सेकेंडरी स्कूल टोंक, राजकीय गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल टोडारायसिंह, राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल दूनी, राजकीय गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल अलीगढ़, राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल टोरडी, राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल निवाई, राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल देवली, राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल राहोली, राजकीय महात्मा गांधी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल गुलजार बाग टोंक, राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल बरवास, राजकीय गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल उनियारा, महात्मा गांधी राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल अरनिया और राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल रानोली को योजना में शामिल किया गया है। सरकार ने करोडों रुपए का बजट किया मंजूर इस प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए सरकार ने बड़ा बजट मंजूर किया है। पहले से संचालित 549 पीएम श्री स्कूलों के लिए 6515.79 लाख रुपए यानी करीब 65 करोड रुपए मंजूर किए गए हैं। वहीं इस सत्र में शामिल की जा रही नई 10 पीएम श्री स्कूलों के लिए 110.03 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। इस राशि से स्कूलों में हाईटेक लैब बनाई जाएंगी, रॉ मटेरियल खरीदा जाएगा और एक्सपर्ट्स को मानदेय दिया जाएगा। अधिकारियों और संस्था प्रधानों की जिम्मेदारी तय योजना को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए राज्य परियोजना निदेशक डॉ. रश्मि शर्मा की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। हर 30 स्कूलों पर एक स्किल नॉलेज फैसिलिटेटर तैनात किया जाएगा, जो हर तीन महीने में प्रत्येक स्कूल का कम से कम दो बार औचक निरीक्षण करेगा। यदि कोई ट्रेनर बिना सूचना अनुपस्थित रहता है या कोई स्कूल इंडस्ट्रियल विजिट नहीं करवाता है तो उसके खिलाफ पेनल्टी का प्रावधान रखा गया है। हर शनिवार स्टूडेंट्स बिना बस्ते के स्कूल आएंगे। इस दौरान उन्हें स्थानीय कारीगरों, प्रगतिशील किसानों, बैंक अधिकारियों और डॉक्टरों से मिलवाया जाएगा, ताकि वे वास्तविक जीवन के अनुभवों को समझ सकें। कक्षा 9 से 12 तक के लिए तय किया गया प्रशिक्षण समय व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की पढ़ाई के साथ जोड़ा गया है। कक्षा 9 और 10 के स्टूडेंट्स के लिए 200 घंटे तथा कक्षा 11 और 12 के स्टूडेंट्स के लिए 300 घंटे का प्रशिक्षण समय तय किया गया है। इसके लिए स्कूल समय से पहले या बाद में तथा नो बैग डे के दौरान अतिरिक्त क्लास लगाई जाएंगी। इस विषय में कुल 100 अंक होंगे। इनमें 20 अंक स्कूल स्तर पर सतत मूल्यांकन जैसे उपस्थिति, पोर्टफोलियो और क्लास परफॉर्मेंस के आधार पर दिए जाएंगे। इसके अलावा 30 अंक की थ्योरी परीक्षा होगी और 50 अंक प्रैक्टिकल कार्य के लिए निर्धारित किए गए हैं। बोर्ड और एनएसडीसी मिलकर देंगे सर्टिफिकेट कक्षा 10वीं और 12वीं पास करने वाले स्टूडेंट्स को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान अजमेर और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएसडीसी) या सेक्टर स्किल काउंसिल की ओर से संयुक्त रूप से मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। शिक्षक संघ ने बताया फायदेमंद कदम शिक्षक संघ रेसटा राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण पहल है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत तैयार इस योजना से स्टूडेंट्स को पढ़ाई के साथ रोजगार से जुड़ा कौशल भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य साल 2026 तक कम से कम 50 प्रतिशत स्टूडेंट्स को व्यावसायिक शिक्षा का अनुभव देना है। साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के सभी वर्गों के स्टूडेंट्स में ड्रॉपआउट दर कम करने और स्कूलों में उनका ठहराव बढ़ाने में भी यह योजना मददगार साबित होगी।