नमस्कार अजमेर के किशनगढ़ में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाया। विधायकजी ने नगर परिषद कमिश्नर को चेतावनी दे डाली। दौसा में एक सांड सरकारी हॉस्पिटल में तफरी कर आया। राजसमंद में फायर ब्रिगेड तब पहुंची, जब आग बुझ गई थी। सवाई माधोपुर में बेटी ने पूरी की पिता की अंतिम इच्छा। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. विधायकजी की कमिश्नर को वार्निंग जब भी विकास की बात होती है, सबसे पहले गाज गरीब पर गिरती है। इसी तर्ज पर किशनगढ़ नगर परिषद ने जोरदार काम किया। बाजार से सारे थड़ी ठेले साफ कर दिए। फुटकर दुकानदारों का सामान-सब्जी जब्त कर लिया। कार्रवाई करने के लिए पुलिस की फौज फील्ड में उतार दी। कार्रवाई के वक्त पता नहीं कहां थे, लेकिन कार्रवाई हो जाने के बाद विधायकजी मौके पर पहुंचे। चेहरे पर गुस्से, रौब, दया और नेता वाली मिली-जुली भंगिमाएं एक साथ। ठेलेवालों के पास जाकर अभयदान दिया- सुनो, ठेले यहीं रहेंगे। यहीं कमाकर खाओ, कोई परेशान नहीं करेगा। इसके बाद वहीं एक ठेले पर खड़े होकर नगर परिषद कमिश्नर को फोन लगा दिया। आवाज में फटकार- पुलिस की फौज क्या लोगों को डराने के लिए बुलाई थी? सुनो कमिश्नर साब ये वॉर्निंग है आपके नगर परिषद को। मैं भी लोगों को लेकर धरने पर बैठ जाऊंगा। जितना सामान जब्त किया है लौटा देना। फिर साहब एक दुकानदार के पास गए। बोले-आखातीज, होली-दीवाली, मैं आपके साथ खड़ा हूं। मेरे रहते चिंता की कोई बात नहीं। बाकी उजाड़ने वाले को सिंघम बनाने का शौक है तो आ जाएं चुनावी मैदान में। 2. हॉस्पिटल के औचक दौरे पर सांड सरकारी हॉस्पिटल में अव्यवस्था से गांव के लोग परेशान। क्या करें। अफसर भी इधर का रुख नहीं करते। सुध लेने वाला कोई नहीं। एक दिन सरकारी हॉस्पिटल में सांड घुस गया। कॉरिडोर में गया। वहां से गलियारे में निकल गया। एक्स-रे रूम के सामने से होता हुआ कंप्यूटर लैब तक पहुंच गया। वहां चैनल गेट बंद मिला। सांड ने फिरकी ली और कंप्यूटर लैब-एक्स-रे रूम के सामने से होता हुआ वाया कॉरिडोर वापस हॉस्पिटल के गेट से बाहर। इस संक्षिप्त औचक दौरे का प्रभावी असर हुआ। हॉस्पिटल में इलाज कराने आए अटेंडेंट ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। इससे हुआ ये कि हॉस्पिटल के सारे रोग सामने आ गए। पता चला कि यहां डॉक्टर के 4 पद स्वीकृत हैं, लेकिन तैनाती एक की भी नहीं। दौसा के कुंडल का ये सरकारी हॉस्पिटल रातों-रात चर्चा में आ गया। जो काम अफसर नहीं कर पाए। सांड महाराज कर गए। 3. आग बुझने के बाद पहुंची फायर ब्रिगेड 1985 के एक सिनेमा में नायिका गाना गाती है- बहुत देर कर दी हुजूर आते-आते। आपातकालीन सेवाओं से जुड़े लोगों को यह गीत सुनना और समझना चाहिए। विकल्प के तौर पर 1991 का ‘देर न हो जाए’ भी सुना जा सकता है। सांप निकल जाने के बाद लाठी पीटने का क्या फायदा। लीक पीटने वालों का मखौल ही उड़ता है। बात राजसमंद की है। यहां चारभुजा थाना इलाके में झीलवाड़ा टोल है। टोल के पास चलती कार धधक उठी। ड्राइवर ने समझदारी दिखाई। कार साइड में खड़ी करके दूर हो गया। टोल कर्मचारी मदद के लिए पहुंचे। पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की। पुलिस कुछ देर में पहुंच गई। लोगों को रोड पर दूर रोक दिया गया। मशक्कत के बाद आग बुझा दी गई। जब सब कुछ शांत हो गया तब सायरन बजाती दमकल आई। दमकल को देख लोग हंसने लगे। फायर कर्मियों ने ठंडी पड़ चुकी कार पर बौछार करने में जितनी तत्परता दिखाई, उसने लोगों की हंसी को बेलगाम कर दिया। 4. चलते-चलते... पुलिस से रिटायर्ड ठाकुर मोहन सिंह ब्रेन कैंसर से जूझ रहे थे। बेटी ब्रजेश कंवर को वे जी-जान से चाहते थे। जब अंतिम वक्त आया तो बोले- अंतिम विदाई तेरे ही हाथों से होनी चाहिए। एक तरफ समाज की परंपराएं तो दूसरी तरफ पिता की अंतिम इच्छा। बेटी शादीशुदा थी। ऐसे में पति और ससुर की भी सहमति जरूरी। पिता के निधन के बाद हिम्मत करके बेटी ने पति-ससुर के सामने बात रखी। दोनों ने ब्रजेश का साथ दिया। पूरा समाज जुटा। पिता की अर्थी को बेटी ने आगे बढ़कर कंधा दिया। चिता को मुखाग्नि दी। बेटी को विवाह के वक्त विदा करके पिता ने फर्ज निभाया तो बेटी ने अंतिम विदाई देकर अपना कर्तव्य निभाया। इनपुट सहयोग- राघवेंद्र गुर्जर (दौसा), नरेंद्र भारद्वाज (सवाई माधोपुर), दिनेश श्रोत्रिय (राजसमंद), रोहित पारीक (किशनगढ़, अजमेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार को मुलाकात होगी।