नमस्कार डीग में गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम झांझ बजाते नजर आए। सीकर में प्रेम सिंह बाजोर ने पुराने दिन याद किए और खेती में सब्सिडी को लेकर हनुमान बेनीवाल समर्थक AI का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. बेढम ने बजाया झांझ पांचना का मुद्दा ऐसा था कि दो जातियों में तनाव बढ़ सकता था। एक पक्ष के किसान वो जो पांचना के बांध क्षेत्र में रहते हैं। दूसरे पक्ष के किसान वो जिनके यहां नहर पहुंचती है। दोनों पक्ष पानी की मांग को लेकर अपने-अपने एरिया में धरना कर रहे थे। हालात नाजुक होते जा रहे थे। विरोधियों ने ऐसा राजनीतिक चक्र चलाया कि पानी का मुद्दा दो जातियों के टकराव में बदल गया। यह सब चल ही रहा था कि तीसरा धड़ा भी खड़ा हो गया। यह उस नदी के तटीय क्षेत्र में बसा वर्ग जिस पर पांचना बांध है। सबको पानी चाहिए था। ऐसे में बेढमजी ने मोर्चा संभाला और जाति की राजनीति से ऊपर उठकर समाज को समझाया कि ये लड़ाई जाति की नहीं है। किसान की है। हम सरकार में बैठे हैं। हमारे लिए तीनों ही पक्ष हमारे भाई हैं, किसान हैं। हम सबको हक का पानी दिलाएंगे। मामला वहीं ठंडा हो गया। गृह राज्यमंत्री जरूरत के हिसाब से हर प्रयास कर रहे हैं। कहीं नगाड़े की थाप पर आवाज पहुंचानी है तो पहुंचा रहे हैं। बयानबाजी करने वाले लोगों का मुंह बंद करना है तो कर रहे हैं। पानी लाने के प्रयास जारी हैं। मंदिर में झांझ तक बजा चुके हैं। बाकी रामजी की इच्छा। 2. RLP के AI क्रिएटर्स कला चिरकाल से अलग तरह से अभिव्यक्ति का माध्यम रही। माध्यम बदलते रहे, लेकिन कला की मारक क्षमता कम नहीं हुई। आजकल AI का जमाना है। जरा सा सूत्र मिल जाए कि सोशल मीडिया हाथों-हाथ लेता है। केंद्रीय मंत्रीजी किसान भी हैं। किसान होने के नाते उन्होंने सरकारी स्कीम से सब्सिडी ले ली। खीरा उपजा लिया। बाकायदा खेत में ही बोर्ड लगाकर सारी जानकारी दे रखी है। इसी पर हाय-घोड़ा हो गया। लोगों ने मुद्दा बना लिया। लंबी-लंबी न्यूज रिपोर्ट बन गई। भागीरथ जी सामने आए। स्पष्ट कहा कि छुपकर कुछ नहीं किया। सब कुछ चौड़े-धाड़ हैं। इधर, हनुमानजी की सेना के क्रिएटर्स ने मौका हाथों-हाथ लपका। डांगाजी के साथ भागीरथजी का भी AI वीडियो बना दिया। दिल्ली में यमुना जल समझौता करवाने पर राजेंद्र राठौड़ साहब ने सीएम भजनलाल को राजस्थान का आधुनिक भागीरथ कहा। क्रिएटर्स को इस पर भी चैन नहीं। भागीरथ को कोट करके खींखीं कर रहे हैं। 3. शिक्षा का महत्व प्रेम सिंह बाजोर नीमकाथाना से दो बार विधायक रहे। अब सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं। हाल ही में उन्होंने नीमकाथाना में 3 जुलाई को होने वाले एजुकेशनल प्रोग्राम में छात्रों से शामिल होने की अपील की। बाजोर साहब शिक्षा का महत्व जानते समझते हैं। शिक्षा सिर्फ वह नहीं जो किताबों और परसेंटाइल की रेस से मिल रही है। जीवन जो सिखा दे, वही शिक्षा सबसे बड़ी। बाजोर जी सीकर आए। उनसे पूछा गया कि आपने अपने खर्चे पर शहीदों की हजार से ज्यादा प्रतिमाएं लगवा दी। कहां से इंतजाम करते हैं। बाजोर ने हंसते हुए कहा- भैया मैंने तो 10 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से लोगों के घरों में बर्तन मांझे हैं। पत्थर ढोने का काम भी किया है। मेरे पास क्या था लगाने के लिए? कहीं से कुछ होता है तो उससे लगवा देते हैं। मैंने ट्रक भी चलाया। जूठे गिलास धोए। यहीं लक्ष्मणगढ़ में पत्थर ढोकर मजदूरी की। वे शिक्षा पर जोर देते हैं क्योंकि शिक्षा अवसरों का विकल्प देती है। भाग्य के सहारे हर किसी की नैया पार नहीं होती। बाजोर की सादगी भी चर्चा में रहती है। कई बार समय की कमी होती है तो वे गाड़ी में सफर करते हुए हाथ में रोटी लेकर खाने से भी गुरेज नहीं करते। इनपुट सहयोग- मुकेश कुमार जांगिड़ (डीग)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।