नमस्कार, मगरमच्छ को लेकर हंगामा मचा है। ये मगरमच्छ चंबल वाले नहीं हैं। रीट-2021 पेपरलीक वाले हैं। हनुमान बेनीवाल को मिली 'खुशी' पर चाकसू विधायक रामावतार की बराबर नजर है और जोधपुर में खेलमंत्री जी ने मिर्ची बड़े का आनंद लिया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. रीट पेपरलीक के ‘मगरमच्छ’ मगरमच्छ को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं। ज्यादातर बातें राजनीतिक होती हैं। जैसे मगरमच्छ के आंसू, पानी में मगरमच्छ से बैर आदि-आदि। राजस्थान की राजनीति में इस वक्त मगरमच्छ छाए हुए हैं। ये वही मगरमच्छ हैं, जिन्हें पकड़ने का ऐलान मुख्यमंत्री भजनलालजी ने किया था। इन मगरमच्छों ने रीट का पेपर लीक कर दिया था। सैकड़ों अभ्यर्थियों का भविष्य चौपट हो गया। यह कांड पिछली सरकार के दौरान हुआ था। जो पकड़े गए उन्हें ‘छोटी मछली’ करार देते हुए बीकानेर में जूली जी ने कहा था- वे कहते थे बड़े मगरमच्छ पकड़ेंगे। पकड़ लिए? अब धरपकड़ की उम्मीद केंद्र सरकार से है। बड़े मगरमच्छों को पकड़ने के लिए शिकारी भी बड़े आएंगे और दिल्ली से आएंगे। क्योंकि कृषि मंत्रीजी ने सीधे केंद्रीय मंत्री अमित शाह को लेटर लिख दिया है। साफ लिखा है कि उच्च स्तरीय जांच कराके मगरमच्छ पकड़िए। धर्मेंद्र प्रधान वाला जख्म भरने के लिए जरूरी है कि मगरमच्छों को आजाद न घूमने दिया जाए। फिलहाल किरोड़ी बाबा दौसा में 9 अगस्त वाले कार्यक्रम को लेकर बिजी रह सकते हैं। इसके बाद उम्मीद है कि मगरमच्छों को चुन-चुन कर दबोचा जाएगा। वो भी कोटा स्टाइल में। 2. हनुमान को मिली 'खुशी' पर भाजपा विधायक की नजर हनुमान बेनीवाल जी ने दिल्ली का जेन-जी आंदोलन करीब से देखा। उन्होंने गांठ बांध ली है कि भविष्य में अगर बेड़ा पार हुआ तो युवाओं के भरोसे ही होगा। ऐसे में वे जेन-जी को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बल्कि एक कदम आगे बढ़कर अल्फाओं को पाले में लाने की फुल फिराक में हैं। 8 साल की इन्फ्लूएंसर खुशी हनुमान बेनीवाल की मुरीद है। कई बार मुलाकात कर चुकी है। हनुमान बेनीवाल को न्याय योद्धा कहती है। भरतपुर की जाट आंदोलन की रैली में तो उसने मंच से कह दिया था कि किसी न्याय योद्धा के लिए वीडियो बनाऊंगी तो सिर्फ हनुमान बेनीवाल के लिए। बेनीवाल जी भी अब खुशी को उसके नाम से जानने लगे हैं। साथ ही यह बात सारा जगत जान चुका है कि बेबी इन्फ्लूएंसर हनुमान बेनीवाल की भगतिन है। चाकसू में एक धार्मिक कार्यक्रम में खुशी पहुंच गई। वहां भाजपा विधायक रामावतार बैरवा भी मौजूद थे। विधायक जी ने तुरंत उलाहना दे दिया। बोले- आजकल हनुमान बेनीवाल के वीडियो ज्यादा बनाती है तू। है ना? मैं देखता हूं तेरे वीडियो। खुशी झेंप गई। इतना ही कहा- धन्यवाद। और क्या कहती? 3. चलते-चलते.. पिछले साल तमिल भाषा की एक फिल्म आई थी। नाम था इडली कढ़ाई। इडली की छोटी सी दुकान चलाने वाले व्यक्ति का बेटा विदेश में बड़ी जंक फूड कंपनी में कार्यरत है। पिता के निधन के बाद उसके सामने दो रास्ते हैं- या तो वह विदेश में ही सेटल होकर फूड कंपनी में मालिक की हैसियत से काम करे। या फिर अपने गांव आकर इडली बनाए। कहानी सिर्फ लोकल को वोकल करने तक सीमित नहीं है। अपना अस्तित्व बचाना है तो अपनी जड़ों से जुड़ी चीजों की कद्र करनी ही पड़ेगी। वरना पहचान खत्म। राजस्थान के जीरा और सौंफ पर गुजरात ने अपनी मुहर लगवा दी। उपज राजस्थान की और GI टैग गुजरात का। क्या करें? हमें अपनी चीजों की कद्र ही नहीं। यही हाल हमारी राजस्थानी भाषा और बोलियों का है। स्कूल-कॉलेजों में नामोनिशान नहीं। अब प्लान बन रहे हैं कि राजस्थानी अध्ययन केंद्र खुलेंगे। जब तक हम अपनी भाषा से प्यार नहीं करेंगे, तब तक अध्ययन केंद्र का क्या मतलब। वहां कौए मंडराएंगे। खेल मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ सिंपल भोजन करते हैं। हाल ही जोधपुर गए। वहां एक नमकीन की दुकान पर पहुंचे। बोले- मिर्ची बड़े के बिना जोधपुर की यात्रा पूरी हो सकती है क्या? मंत्रीजी की फरमाइश तुरंत पूरी हुई। थाल भरकर गर्मागर्म मिर्ची बड़े हाजिर किए गए। मंत्री जी ने खुद खाया और साथ के सभी लोगों को भी स्वाद चखवाया। इनपुट सहयोग- जयदीप पुरोहित (जोधपुर), प्रकाश तंवर (नागौर), रईस पठान (इटावा, कोटा)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।