नमस्कार राजस्थान में न तो बादलों से राहत मिल रही है और और न ही तबादलों से। अलवर में नेताजी को उनके विरोधी ‘गैंडा स्वामी’ तक कहते हैं लेकिन उनका कॉन्फिडेंस डिगता नहीं और दिल्ली पुलिस में चूरू की ममताजी ने अलग तरह से नाम कमाया है। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. तबादलों से भी राहत नहीं.. मानसून का सीजन चल रहा है, लेकिन बादलों से कोई राहत नहीं मिल रही। वैसे तबादलों से भी राहत नहीं मिल रही है। क्यों? क्योंकि तबादला सूचियों में इतनी भारी-भारी खामियां हुईं कि क्या बताएं। डीग में एक पटवारी ने विधायक शैलेश दिगंबर सिंह से अर्जी लगाई कि बालोतरा से डीग ट्रांसफर करवा दीजिए। विधायकजी ने भी तगड़ी डिजायर लगाई। जब तबादला लिस्ट आई तो पटवारी ने सिर पीट लिया। विभाग ने उसकी जगह विधायकजी का नाम ट्रांसफर लिस्ट में लिख दिया। अब परेशान पटवारी इधर-उधर घूम रहा है। उधर, विधायकजी सोचते होंगे कि जॉइन ही कर लूं, परमानेंट नौकरी है। टोंक में एक तहसील है दूनी। यहां अब तक पाठशाला में बच्चे ‘दो दूनी चार’ पढ़ते थे। अब पढ़ेंगे ‘दूनी में दो तहसीलदार’। क्योंकि विभाग ने यहां विपुल चौधरी को भी तहसीलदार लगा दिया और अजय कुमार पांडेय को भी। विपुल चौधरी पर तो इतनी मेहरबानी कि दूनी तहसीलदार के अलावा उन्हें फुलेरा का उप पंजीयक भी बना दिया। यानी ट्रांसफर करने में कोई कंजूसी नहीं। बंपर ट्रांसफर लो। एक पद पर दो-दो अधिकारी भी लगाए और एक अधिकारी को दो-दो जगह भी लगाया। इसी लिस्ट में किशनगढ़ (अजमेर) से नायब तहसीलदार प्रेमसुख वैष्णव का तबादला प्रेमपूर्वक परबतसर किया और सुखपूर्वक कुचामन भी कर दिया। जाओ सर, जहां मर्जी हो वहां जॉइन कर लो। आप भी क्या याद करोगे। इतना ही नहीं, जो रिटायर हो चुके उनको भी नहीं छोड़ा। हद तो तब हो गई, जब स्वर्ग सिधार चुके ASI अनोपारामजी की भी बदली कर डाली। इंद्र का सिंघासन हिलाओगे क्या अब? 2. नेताजी को ‘गैंडा स्वामी’ कहते हैं.. एक नेता को कभी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। खासतौर पर तब, जब निकाय और पंचायत चुनाव सिर पर हों। नेताजी अलवर में भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष रहे। इन दिनों बुरी तरह एक्टिव हैं। आलाकमान का ध्यान खींचने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। कुछ दिन पहले इन्होंने नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल को खुली चुनौती दे दी थी। बेनीवाल ने मुख्यमंत्रीजी की जाति को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद से महोदय कोई मौका नहीं छोड़ रहे। हाल ही में उन्होंने एक पत्रकार को ‘मन की बात’ बताई। कहा- मुझे मेरे विरोधी ‘गैंडा स्वामी’ कहते हैं। ‘कालिया नाग’ कहते हैं। और भी बहुत कुछ कहते हैं। भगवान ने मुझे कृष्णजी का रंग दिया है काला। तो मैं कलियुग का कृष्ण भगवान हूं। मेरे चक्र के नीचे जो आ गया वो बचेगा नहीं। बॉडी शेमिंग करने वालों को नेताजी ने करारा जवाब दिया। आदमी का रंग कैसा भी हो, न मन काला होना चाहिए और न कारनामे। इसलिए लगे रहो नेताजी, भगवान जरूर सुनेगा। 3. चलते-चलते.. कई लोग इस बात से इत्तेफाक रख सकते हैं कि पुलिस वालों की भाषा बड़ी कड़क और कर्कश होती है। वे भी क्या करें। रात-दिन अपराध और अपराधियों से घिरे रहते हैं। इतनी नेगेटिव एनर्जी लेकर आदमी अबे-तबे करेगा ही। लेकिन सारे पुलिसवाले एक जैसी भाषा नहीं बोलते। आप कभी हनुमानगढ़ वाले ट्रैफिक पुलिस अधिकारी अनिल चिंदा से मिलिए। आपकी रूह प्रसन्न हो जाएगी। इतने सभ्य और मनोरंजक ढंग से ट्रैफिक रूल्स को लेकर लोगों को जागरूक करते हैं कि पुलिस परेड दिवस पर सीएम ने सम्मानित किया। इसी तरह जयपुर के ट्रैफिक पुलिस अधिकारी प्रवीण कुमार उर्फ पी.के. मस्त हैं। वे ड्यूटी पर तैनात थे। एक कार को उन्होंने रोका। ड्राइवर से पूछा- कहां के हो? ड्राइवर ने जन्मस्थान की जानकारी दी। अब ड्राइवर ने पूछा- आप कहां के हो? ट्रैफिक पुलिस अधिकारी ने कहा- मेरी शादी हो चुकी है, मैं कहीं का नहीं रहा। चालान के डर से घबराया ड्राइवर खुलकर हंसा। राजस्थान के चूरू जिले के छोटे से गांव मेलुसर की ममता सोनगरा दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल हैं। उन्हें गाने का शौक। सिंगिंग टैलेंट इतना गजब कि जब भी गाती हैं तो सोशल मीडिया पर उनका गीत वायरल हो जाता है। एक प्रोग्राम में उन्होंने ‘दिल है कि मानता नहीं’ गीत गाया। इतनी मधुर आवाज सुनकर खुद सिंगर अनुराधा पौडवाल ने उनका हौसला बढ़ाया। सिंगर मीका सिंह के साथ वे स्टेज भी शेयर कर चुकी हैं। कानून की हिफाजत के लिए पुलिसवालों को कड़क भाषा बोलनी पड़ती है। इसके मतलब ये नहीं कि बोली की मिठास का महत्व उन्हें पता नहीं। इनपुट सहयोग- महावीर बैरवा (टोंक), मुकेश कुमार जांगिड़ (डीग), विजय कुमार (बाड़मेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।