राजस्थान के निजी विद्यालय संचालकों ने शिक्षा विभाग की नीतियों पर कड़ा असंतोष जताया। कंवराराम बेरड़, सुरेश जाटोल, लालचन्द, वीरसिंह, नवीन गोदारा, प्रेम परिहार, बरकत मालिया सहित दर्जनों संचालकों के नेतृत्व में प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशक बीकानेर के नाम 19 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया। ज्ञापन में निजी विद्यालयों के प्रति कथित दमनकारी, अव्यावहारिक, भेदभावपूर्ण नीतियां तुरंत खत्म करने की मांग की गई। वर्षों से लंबित आरटीई भुगतान जारी करने की मांग रखी गई। ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि 24 जुलाई तक मांगों का समाधान नहीं हुआ तो निजी विद्यालय लोकतांत्रिक व संवैधानिक तरीके से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। इसकी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग व राज्य सरकार की होगी। संचालकों ने कहा कि प्रदेश के हजारों निजी विद्यालय वर्षों से गुणवत्तापूर्ण, सुलभ शिक्षा में सरकार के सहयोगी रहे हैं। ज्ञापन में शिक्षा संबलन निरीक्षण व्यवस्था खत्म करने, नो ड्यूज प्रमाण पत्र के बिना टीसी जारी करने की बाध्यता हटाने, प्री-प्राइमरी सहित सभी लंबित आरटीई भुगतान तुरंत जारी करने, 2018-19 से लंबित भुगतान का निस्तारण, डबल एनरोलमेंट की समस्या का स्थायी समाधान, हर सत्र खत्म होने से पहले आरटीई की दोनों किश्तों का भुगतान करने, यूनिट कॉस्ट में हर साल 10 प्रतिशत वृद्धि, पुस्तकों की राशि सीधे अभिभावकों के खातों में भेजने, नई आरटीई आवंटन व्यवस्था से बने अतिरिक्त वित्तीय भार की जिम्मेदारी विभाग से लेने, अनावश्यक निरीक्षण, उत्पीड़न रोकने, नई नीतियों से पहले निजी विद्यालय संगठनों से परामर्श, भुगतान में देरी पर ब्याज सहित राशि देने की मांग रखी गई।