राजस्थान में निजी स्कूलों के लिए लागू किए जा रहे 'राज संबलन' और 'शिक्षा संबलन' कार्यक्रम का विरोध तेज हो गया है। नागौर जिला प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन और राजस्थान प्राइवेट इंस्टीट्यूशंस एंड स्कूल्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव और शिक्षा निदेशक के नाम जिला कलेक्टर के जरिए ज्ञापन सौंपा। संगठनों ने नए आदेश वापस लेने, आरटीई का लंबित भुगतान जारी करने और निजी स्कूलों में बढ़ते प्रशासनिक हस्तक्षेप को रोकने की मांग की है। जिला कलेक्टर के जरिए सरकार तक पहुंचाई मांग नागौर में निजी स्कूल संगठनों के पदाधिकारी और शिक्षक जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव और शिक्षा निदेशक के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में 'राज संबलन' और 'शिक्षा संबलन' कार्यक्रम के तहत जारी आदेशों को वापस लेने की मांग की गई। निरीक्षण और जांच व्यवस्था पर जताई आपत्ति एसोसिएशन का कहना है कि 3 जुलाई 2026 को जारी शिक्षा संबलन कार्यक्रम के तहत निजी स्कूलों में निरीक्षण और अलग-अलग तरह की जांच की व्यवस्था की गई है। संगठनों का आरोप है कि यह निजी शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता में अनावश्यक हस्तक्षेप है और इससे निजी स्कूलों का स्वतंत्र संचालन प्रभावित होगा। कलेक्टर कार्यालय के बाहर बैठे शिक्षक ज्ञापन देने के दौरान शिक्षक और निजी स्कूल संचालक कलेक्टर कार्यालय के बाहर बैठे नजर आए। उन्होंने कहा कि निजी स्कूल पहले से कई तरह की प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं, इसके बावजूद उन पर लगातार नए नियम और जांच का दबाव बनाया जा रहा है। आरटीई भुगतान का मुद्दा भी उठाया शिक्षकों और स्कूल संचालकों ने कहा कि आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स के भुगतान का कई सालों से समय पर निस्तारण नहीं हुआ है। उनका कहना है कि निजी स्कूलों का पिछले चार साल का भुगतान अभी भी लंबित है। ऐसे में पहले लंबित भुगतान का समाधान किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के अलग-अलग फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निजी शिक्षण संस्थानों के दैनिक प्रशासन में सरकार का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए। साथ ही राजस्थान गैर-सरकारी शैक्षणिक संस्थान (मान्यता, प्रबंधन और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1993 का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को नियमन का अधिकार है, लेकिन संस्थानों के आंतरिक प्रबंधन में हस्तक्षेप का नहीं। आदेश और एप्लीकेशन वापस लेने की मांग संगठन ने सरकार से नए आदेश और उनसे जुड़ी एप्लीकेशन को निरस्त करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो निजी विद्यालय संगठन न्यायालय का रुख करने के लिए मजबूर होंगे। प्रमुख मांगें