राजस्थान के सरकारी स्कूलों की बदहाल और जर्जर होती इमारतों ने अब सरकार की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में करीब 90 प्रतिशत सरकारी स्कूल भवनों को मरम्मत की जरूरत बताई गई है, जबकि हजारों स्कूलों को बच्चों के लिए असुरक्षित माना गया है। लगातार सामने आ रहे हादसों और बच्चों की सुरक्षा पर मंडरा रहे खतरे के बीच शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए सभी सरकारी स्कूल भवनों का टेक्निकल ऑडिट सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियरों से कराने के आदेश जारी किए हैं। अब PWD तय करेगा कि कौन सा स्कूल भवन सुरक्षित है और कौन सा पूरी तरह ‘अनसेफ’। जिन भवनों को खतरनाक घोषित किया जाएगा, उन्हें तुरंत खाली करवाकर वहां ताला लगाया जाएगा और बच्चों को दूसरे सुरक्षित स्कूलों या सामुदायिक भवनों में शिफ्ट किया जाएगा। 90% सरकारी स्कूलों को मरम्मत की जरूरत शिक्षा विभाग की ओर से हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट ने सरकारी स्कूलों की स्थिति की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में कुल 45,365 सरकारी स्कूल हैं, जिनमें से 41,178 स्कूल ऐसे हैं जिन्हें बड़े स्तर पर मरम्मत की आवश्यकता है। यानी प्रदेश के करीब 90 प्रतिशत सरकारी स्कूल किसी न किसी रूप में जर्जर स्थिति में हैं। अब PWD करेगा टेक्निकल ऑडिट शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों के लिए टेक्निकल ऑडिट अनिवार्य कर दिया है। प्रदेश के सभी 45 हजार से ज्यादा स्कूल भवनों का भौतिक सत्यापन PWD के एक्सईएन (XEn) और एईएन (AEn) स्तर के इंजीनियर करेंगे। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 15 दिन के भीतर PWD के साथ समन्वय कर रिपोर्ट निदेशालय को भेजें। असुरक्षित भवनों पर लगेगा ताला आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन स्कूल भवनों को PWD ‘अनसेफ’ घोषित करेगा, उन्हें तुरंत खाली करवाकर वहां ताला लगाया जाएगा। ऐसे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को नजदीकी सुरक्षित सरकारी स्कूलों या सामुदायिक भवनों में शिफ्ट किया जाएगा। वहीं जो भवन मरम्मत योग्य नहीं होंगे, उन्हें ध्वस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी। अब ‘जुगाड़’ सिस्टम नहीं चलेगा अब तक सरकारी स्कूलों की जर्जर स्थिति की रिपोर्ट संस्था प्रधान या स्कूल प्रशासन अपने स्तर पर तैयार करता था। कई मामलों में बजट की कमी या रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए जर्जर कमरों में भी बच्चों की क्लास लगाई जाती थी। लेकिन झालावाड़ और अन्य जिलों में हुए हादसों के बाद सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट होगा अनिवार्य माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने आदेश में कहा है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब सभी सरकारी स्कूलों के लिए PWD इंजीनियरों से ‘स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट’ लेना अनिवार्य होगा। यदि इसके बाद भी कोई हादसा होता है तो संबंधित तकनीकी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्राइवेट स्कूलों में कम क्यों आते हैं ऐसे मामले प्रदेश के निजी स्कूलों में जर्जर भवनों की शिकायतें अपेक्षाकृत कम आती हैं। इसका कारण यह है कि निजी स्कूलों को हर तीन साल में भवन सुरक्षा प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होता है। इसके लिए शुल्क भी जमा करना पड़ता है। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उन्हें मान्यता मिलती है, जबकि सरकारी स्कूलों में अब तक यह प्रक्रिया अनिवार्य नहीं थी। अगले 6 महीने में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी शिक्षा विभाग इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बजट 2026-27 में नए सिरे से फंड आवंटित करेगा। सरकार का लक्ष्य है कि अगले छह महीनों में प्रदेश के किसी भी स्कूल में बच्चे जर्जर छत के नीचे बैठकर पढ़ाई न करें। झालावाड़ हादसे के बाद बढ़ी सख्ती दरअसल, 25 जुलाई को झालावाड़ के मनोहरथाना ब्लॉक स्थित पिपलोदी सरकारी स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी और 21 बच्चे घायल हुए थे। वहीं 13 जनवरी को बूंदी में सरकारी स्कूल के बरामदे की करीब 50 फीट लंबी छत अचानक गिर गई थी। हालांकि उस समय वहां बच्चे मौजूद नहीं थे। इन घटनाओं के बाद से शिक्षा विभाग लगातार जर्जर स्कूल भवनों को लेकर सख्त कदम उठा रहा है।