सवाई माधोपुर में एक बार फिर पीला पलाश का फूल मिला है। दो साल पहले भी जिले के जंगल में ये फूल देखा गया था। इा बार बौंली क्षेत्र के गोल वन क्षेत्र में ये फूल मिला है। केसरिया पलाश के पेड़ों के बीच दो पीले रंग के दुर्लभ प्रजाति के पेड़ मिले है , जिन्हें वन विभाग द्वारा संरक्षित किया जाएगा। वन विभाग करेगा संरक्षित पलाश को “फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट” के नाम से जाना जाता है, लेकिन पीले रंग का पलाश बेहद दुर्लभ माना जाता है। वन विभाग के अनुसार गोल वन क्षेत्र में करीब दो साल पहले पहली बार पीले पलाश का फूल देखा गया था और इस साल फिर से इसका खिलना बेहद खास माना जा रहा है। पीले पलाश की यह प्रजाति संरक्षित श्रेणी में आती है और बहुत कम स्थानों पर ही देखने को मिलती है। यह एक दुर्लभ प्रजाति है, जिसे वन विभाग द्वारस संरक्षित किया जा रहा है। वनाधिकारियों के मुताबिक पीले पलाश के बीज एकत्र कर नर्सरी में पौधे तैयार किए जाएंगे ओर दूसरी जगह पर भी इसे लगाया जाएगा । पीला पलाश अधिकतर दक्षिणी क्षेत्र उदयपुर, चित्तौड़गढ़ की तरफ पाया जाता है। यह पहला मौका है जब सवाई माधोपुर जिले में पीले पलाश के दो पेड़ मिले है । सामाजिक वानिकी वन विभाग की टीम ने गश्त के दौरान इस दुर्लभ पेड़ को चिन्हित कर उसके फोटो लिए और उच्च अधिकारियों को सूचना दी । अब वन विभाग इसके संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान दे रहा है। पलाश के फूल जहां अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं, वहीं इनमें औषधीय गुण भी पाए जाते हैं, प्राचीन समय में होली के प्राकृतिक रंग भी इन्हीं फूलों से बनाए जाते थे। फिलहाल बौंली वन क्षेत्र में मिला यह पीला पलाश न सिर्फ वन विभाग के लिए बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी खास आकर्षण बना हुआ है और आने वाले समय में इसके संरक्षण की दिशा में बड़े प्रयास किए जाएंगे