राज्य में प्रवेशोत्सव अभियान को लेकर शिक्षा विभाग अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। नामांकन के लक्ष्यों में पिछड़ने और पिछले वर्ष की तुलना में छात्र संख्या में भारी गिरावट आने पर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने कड़ा रुख अपनाया है। निदेशालय ने प्रदेश भर की 175 सरकारी स्कूलों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है, जिसमें झुंझुनूं जिले की दो बड़ी स्कूलें भी शामिल हैं। ​झुंझुनूं के इन स्कूलों पर गिरी गाज ​शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची में झुंझुनूं जिले के दो प्रमुख शिक्षण संस्थानों के नाम शामिल है। नोटिस पाने वाले स्कूलों में पीएमश्री शहीद कर्नल जे.पी. जानू राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, झुंझुनूं और ​पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, उदयपुरवाटी शामिल है। ये दोनों ही स्कूल 'पीएमश्री' योजना के तहत चयनित हैं, जिन्हें मॉडल स्कूल के रूप में देखा जाता है। इसके बावजूद नामांकन में कमी को विभागीय निर्देशों की अवहेलना और कार्य के प्रति उदासीनता माना गया है। ​तीन दिन में मांगा जवाब ​निदेशक माध्यमिक शिक्षा द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन विद्यालयों में पिछले सत्र के मुकाबले नामांकन में काफी कमी आई है। ​ संबंधित प्रधानाचार्यों को ई-मेल के जरिए तीन कार्य दिवस के भीतर अपना स्पष्टीकरण भेजने और नामांकन लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। ​कठोर चेतावनी दी गई है कि यदि तीन दिन में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो संबंधित संस्था प्रधानों के खिलाफ राजस्थान असैनिक सेवा नियम 1958 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। ​ कहीं 700 छात्र कम हुए, तो कहीं नामांकन ‘शून्य’ ​निदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार, केवल झुंझुनूं ही नहीं बल्कि बीकानेर, जयपुर, दौसा, धौलपुर, अजमेर और बांसवाड़ा जैसे जिलों में भी स्थिति चिंताजनक है। ​कई स्कूलों में नामांकन की संख्या में 100 से लेकर 700 तक की गिरावट दर्ज की गई है। ​सबसे चौंकाने वाला मामला बाड़मेर जिले के आदेल विद्यालय का सामने आया है, जहां नामांकन गिरकर शून्य पर पहुंच गया है। ​नामांकन बढ़ाने के लिए अब घर-घर दस्तक ​विभाग ने सख्त हिदायत दी है कि नामांकन में सुधार केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को अब धरातल पर उतरकर वंचित बच्चों को स्कूल से जोड़ने और ड्रॉप-आउट रेट कम करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करने होंगे।