कॉम्पिटिटिव एग्जाम के दबाव और पेपर लीक जैसी घटनाओं को लेकर कलाकारों ने जयपुर में शॉर्ट फिल्म ‘पेपर लीक’ बनाई है। एवरेस्ट मोशन पिक्चर और आगाज द अमेजिंग रंगमंच ग्रुप के बैनर तले बनी इस फिल्म में संदेश दिया है कि किसी भी परिस्थिति में आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। यह फिल्म नीट एग्जाम पेपर लीक मामले के बाद मानसिक तनाव का सामना कर रहे स्टूडेंट्स और उनके परिवारों की भावनाओं को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है। फिल्म का लेखन और निर्देशन फिरोज मिर्जा ने किया है। रिलीज होने के महज 24 घंटे में इस फिल्म को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक लाख से अधिक लोगों ने देखा। पिता के संघर्ष और बेटी के सपनों की कहानी फिल्म की कहानी ऐसे मध्यमवर्गीय परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां पिता अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना देखता है। बेटी की नीट परीक्षा की तैयारी के लिए पिता बैंक से लोन लेकर बेटी को जयपुर में कोचिंग के लिए भेजता है। पिता को विश्वास है कि मेरी बेटी मेहनत से सफलता हासिल करेगी और परिवार के सपनों को साकार करेगी। नीट परीक्षा होने के कुछ दिनों बाद अखबार में पेपर लीक की खबर पढ़कर पिता गहरे सदमे में चला जाता है। सालों की मेहनत, आर्थिक संघर्ष और बेटी के भविष्य को लेकर चिंता उसे इस कदर तोड़ देती है कि उसे हार्ट अटैक आ जाता है और उनकी मौत हो जाती है। वहीं पिता की मौत की खबर से बेटी भी पूरी तरह टूट जाती है और भावनात्मक आवेश में आत्महत्या जैसा गलत कदम उठा लेती है। जीवन से हार नहीं मानें स्टूडेंट्स फिल्म इसी दर्दनाक घटनाक्रम के माध्यम से यह सवाल उठाती है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं का सबसे बड़ा नुकसान उन मेहनती छात्रों और उनके परिवारों को उठाना पड़ता है, जो सालों तक सपनों के लिए संघर्ष करते हैं। फिल्म में यह भी स्पष्ट किया गया है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, जीवन से हार मानना समाधान नहीं है। कठिन समय में धैर्य, परिवार का साथ और मानसिक मजबूती ही सबसे बड़ी ताकत होती है। फिल्म युवाओं से अपील करती है कि वे असफलता या किसी भी संकट की स्थिति में आत्महत्या जैसा कदम न उठाएं, बल्कि संघर्ष करते हुए आगे बढ़ें। कलाकारों ने निभाए प्रभावशाली किरदार फिल्म में सिकंदर चौहान ने संघर्षशील पिता की भूमिका को बेहद संवेदनशीलता के साथ निभाया है। डॉ. बुलबुल नायक ने नीट अभ्यर्थी बेटी के किरदार में भावनात्मक अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। वहीं करन सोनी ने बैंक अधिकारी की भूमिका निभाकर कहानी को यथार्थ के करीब पहुंचाया है। तीनों कलाकारों के अभिनय ने फिल्म को अंत तक बांधे रखा। फिल्म की शूटिंग अचरोल, दिल्ली रोड पर हुई फिल्म की शूटिंग अचरोल, दिल्ली रोड और एक स्कूल परिसर सहित विभिन्न स्थानों पर की गई। सीमित संसाधनों के बावजूद फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया गया है। इससे दर्शक कहानी के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं। निर्देशक फिरोज मिर्जा ने कहा- इस फिल्म का उद्देश्य केवल एक घटना को दिखाना नहीं, बल्कि युवाओं में जीवन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना है। उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव कितना भी बड़ा क्यों न हो, हर परिस्थिति का समाधान संघर्ष और धैर्य से निकाला जा सकता है, आत्महत्या से नहीं।