लोकसभा में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहरलाल खट्टर ने कहा कि बिजली कंपनियां किसी उपभोक्ता के जबरन स्मार्ट मीटर नहीं लगा सकती है। आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल के सवाल के जवाब में खट्टर ने कहा कि उपभोक्ता के अनुरोध पर वितरण लाइसेंसधारी प्री-पेमेंट मीटर उपलब्ध कराएगा। सरकार ने विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम 2020 जारी किए हैं, जिनमें यह अनिवार्य किया गया है कि नए कनेक्शन केवल स्मार्ट प्री-पेमेंट मीटर या प्री-पेमेंट मीटर के साथ ही दिए जाएंगे, इसमें राज्यों के नियामक आयोग अपने हिसाब से प्रावधान करेंगे। हनुमान बेनीवाल ने पूरक सवाल उठाते हुए कहा कि राजस्थान में जबरन स्मार्ट मीटर लगा जा रहे हैं, जबकि जबरन का प्रावधान ही नहीं है। इसके जवाब में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहरलाल खट्टर ने कहा- किसी भी प्रदेश में जबरन स्मार्ट मीटर थोंपे जाने की सूचना नहीं है। अगर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने की शिकायत मिलेगी तो हम संज्ञान लेंगे। जिन प्रदेशों में यूटिलिटी (बिजली) में घाटे हो रहे हैं। डिफॉल्टर उपभोक्ता कई साल से बिल नहीं भर रहे थे, उनके बिल प्रीपैड करेंगे तो ही कनेक्शन चालू होगा। कुछ राज्यों ने यह लागू किया है। उनके पिछले बिजली के बिल किश्तों में जमा करवा सकते हैं। खट्टर बोले- बिजली बिल नहीं भरना स्वाभिमान का मुद्दा बन गया खट्टर ने कहा कि कई राज्यों में बिजली बिल नहीं भरना अभ्यास बन गया। मैं हरियाणा सीएम रहा, उस वक्त बहुत से इलाकों में बिजली बिल नहीं भरना स्वाभमिान का विषय है। बहुत से लोग कहते थे कि बिजली बिल नहीं भरेंगे। मुझे कहना पड़ता था कि बिल नहीं भरोगे तो बिजली नहीं मिलेगी। वहीं गांव आज हरियाणा में 6400 में से 6000 गांवों में 24 घंटे बिजली मिल रही है। हरियाणा में प्री-प्रेड मीटर लागू किया वहां कंपनियों के घाटे खत्म हो गए, कंपनियां लाभ में आ गई हैं। बिजली कंपनियां कॉमर्शियल कंपनीज हैं, वो कोई सेवा का काम नहीं करते हैं, जितना बिजली सप्लाई करेंगे उतना पैसा लेना है। खट्टर ने कहा कि 2017 में बिजली कंपनियां सात लाख करोड़ घाटे में थीं। इसके बाद उदय स्कीम में राज्यों ने बॉन्ड जारी कर कर्ज को टेकऑवर किया। आज फिर बिजली कंपनियां सात लाख करोड़ के घाटे में आ गई हैं। बेनीवाल बोले- स्मार्ट मीटर योजना बिजली क्षेत्र में छिपे हुए निजीकरण की दिशा में कदम बेनीवाल ने कहा- स्मार्ट मीटर योजना बिजली क्षेत्र के छिपे हुए निजीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो सीधे उपभोक्ताओं के अधिकारों पर हमला भी है। आज राजस्थान सहित कई राज्यों में स्मार्ट मीटर के खिलाफ भारी जन-आक्रोश व्याप्त है। मंत्री ने जवाब में यह स्वीकार किया कि उपभोक्ताओं के अनुरोध पर प्री-पेमेंट मीटर उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। इसके बावजूद जिन कंपनियों को स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका मिला हुआ है, उन्हें लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अधिकारियों की मिलीभगत से उपभोक्ताओं को जबरन प्रीपेड स्मार्ट मीटर थोंपे जा रहे है। राज्यों में जबरन स्मार्ट मीटर पर निगरानी तंत्र से जुड़े सवाल का ऊर्जा मंत्री के पास कोई जवाब नहीं था।