सब इंस्पेक्टर (एसआई भर्ती) भर्ती-2021 में चयनित ट्रेनी सब इंस्पेक्टर्स ने सरकार को नार्को-पॉलीग्राफी टेस्ट की चुनौती दी हैं। इन ट्रेनी सब इंस्पेक्टर्स ने अपने पेरेंट्स के जरिए सीएम भजनलाल को शपथ पत्र भेजकर कहा है कि हमारे बच्चे स्वेच्छा से नार्को एनालिसिस और पॉलीग्राफ परीक्षण हेतु तैयार हैं। हम लिखित सहमति देते हैं कि इन परीक्षणों के परिणामों को ही उनकी बेगुनाही या दोष का अंतिम साक्ष्य माना जाए। यदि वे इसमें असफल पाए जाते हैं, तो सरकार उन्हें तत्काल बर्खास्त कर उनकी निजी संपत्ति से संपूर्ण वेतन की वसूली करने हेतु स्वतंत्र है। हमारी बलि देकर गलतियां छिपाना चाहते है शपथ पत्र में सीएम को कहा गया कि आपकी सरकार का स्पष्ट स्टैंड रहा है कि सेग्रीगेशन (पृथक्करण) संभव है और भर्ती में कोई मास लीकेज नहीं हुआ है। इसके बावजूद, जांच एजेंसी (एसओजी) के कुछ अधिकारियों ने कोर्ट में भ्रामक रिपोर्ट्स पेश की। यह स्पष्ट रूप से सरकार की साख गिराने और निर्दोषों की बलि देकर अपनी पिछली गलतियों को छिपाने की एक सोची-समझी साजिश है। अधिकारियों ने कोर्ट को गुमराह किया अभिभावकों ने अपने पत्र में कहा- आपकी सरकार के दौरान पिछली सरकार की लगभग 19 संदिग्ध भर्तियों में से 17 भर्तियों की जांच चल रही है, लेकिन उनमें से एक भी रद्द नहीं किया गया है। फिर केवल सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2021 के मामले में ही अधिकारियों द्वारा कोर्ट को पृथक्करण असंभव है, कहकर गुमराह क्यों किया गया। यह भेदभावपूर्ण सामूहिक दंड 750 से अधिक परिवारों को बर्बाद करने वाला निर्णय है। आपकी सरकार के नाम कलंक होगा अभिभावकों के जरिए ट्रेनी सब इंस्पेक्टर्स ने सीएम से कहा- राजस्थान के इतिहास में आपकी छवि एक संवेदनशील जननायक की रही है, लेकिन यदि यह भर्ती रद्द होती है, तो इतिहास में आप पहले ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में दर्ज होंगे। जिनके कार्यकाल में 750 से ज्यादा निर्दोष परिवारों को सामूहिक सजा देकर बर्बाद किया गया। यह आपकी सरकार के नाम पर एक ऐसा 'कलंक' होगा कि 'दोषी बच गए और निर्दोष मारे गए।' प्रशासनिक लापरवाहियों का खामियाजा उन ईमानदार युवाओं को भुगतना पड़ रहा है जिन्होंने अपनी मेहनत से वर्दी पाई है। सुप्रीम कोर्ट में कहा जाए-पृथक्करण संम्भव अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि वह सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से सबसे अनुभवी वकीलों के माध्यम से मजबूत कानूनी पैरवी सुनिश्चित करें। कोर्ट को यह बताया जाए कि सेग्रीगेशन संभव है और अभ्यर्थी स्वयं वैज्ञानिक जांच हेतु तैयार हैं। जिससे हमारे 750 से ज्यादा परिवारों के जीवन को उजड़ने से बचाया जा सके। बता दें कि इस भर्ती को पेपरलीक और भारी अनियमित्ताओं के कारण हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को रद्द कर दिया था। वहीं खंडपीठ ने चयनित सब इंस्पेक्टर्स और सरकार की अपील को खारिज करते हुए 4 अप्रेल को एकलपीठ के भर्ती रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा था।