बांसवाड़ा में सरकारी टीचर का शव उनके ही खेत में मिला, टीचर के सिर के पीछे पत्थर से चोट का निशान है। वे शनिवार रात से लापता थे। परिजनों ने हत्या का शक जताया और कहा- मौके पर डॉग स्क्वायड को बुला कर सबूत जुटाए जाएं। इसके बाद परिजन खेत में टेंट गाड़ कर धरने पर बैठ गए। 10 घंटे चले धरने के बाद सहमति बनी। मामला गढ़ी थाना क्षेत्र के मांदलदा गांव का 8 बजे का है। डीएसपी बाबूलाल रैगर का कहना है कि मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया है। इसकी वीडियोग्राफी भी करवाई गई है। हालांकि मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉक्टर सुनील मईडा का कहना है कि मृतक के सिर पर हल्की चोट का निशान है। खेत की मेढ़ के पास मिला शव गढ़ी थाना SHO रमेशचंद्र ने बताया- सरकारी टीचर डूंगरलाल (58) पुत्र देवा शनिवार शाम को अपने खेत पर पितृदेव की पूजा के लिए घर से निकले थे। उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल खेत के बाहर खड़ी की थी। उसका शव खेत की मेढ़ के पास मिला है। SHO ने बताया- जब वे देर रात तक घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने उनकी तलाश की, लेकिन उनका कहीं पता नहीं चला। आज सुबह जब ग्रामीण खेतों की तरफ गए, तो डूंगरलाल का शव खेत में पड़ा मिला। शव के पास ही पूजा की सामग्री, फूल-माला, नारियल और पानी की बोतल बरामद हुई है। मृतक के सिर के पिछले हिस्से में पत्थर की चोट के निशान मिले हैं। पहले देखिए ये 2 तस्वीरें… ​प्रथम दृष्टया मामला हत्या का नहीं लग रहा: एसपी एसपी सुधीर जोशी ने बताया कि करीब 8 बजे हमें इस घटना की सूचना मिली थी। प्रथम दृष्टया मौके की स्थिति और साक्ष्यों को देखने पर यह हत्या का मामला नहीं लग रहा है। संभवतः असंतुलन बिगड़ने या अन्य किसी कारण से गिरने से चोट लगी हो। हालांकि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। परिजनों ने जताया हत्या का शक ग्रामीणों का कहना है कि यह महज एक हादसा नहीं बल्कि सोची-समझी हत्या हो सकती है। फिलहाल मौके पर तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। एएसपी नरपतसिंह, डिप्टी बाबूलाल रैगर सहित भारी पुलिस बल मौजूद रहा। रातभर ढूंढते रहे परिजन मांदलदा के उपप्रधान दशरथ सिंह वाघेला ने बताया- डूंगरलाल की पोस्टिंग गांव के ही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में थी। वे देर रात तक घर नहीं लौटे तो बेटे ने उनकी तलाश की। इसके बाद सुबह 5 बजे खेत में उनका शव मिला। डूंगरलाल के 2 बेटे और 2 बेटियां हैं। एक बेटा सरकारी टीचर है। इन तीन मांगों पर बनी सहमति