राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा-2024 का रिजल्ट इस बार कई मायनों में खास है। एक और तक कम समय में पूरी परीक्षा प्रक्रिया कम्पलीट हो गई, दूसरा अब तक परीक्षा और रिजल्ट को लेकर कोई विवाद भी सामने नहीं आया है। इन सब के बीच इस परीक्षा के कई होनहार की सक्सेस जर्नी भी लोगों का ध्यान खींच रही है। इनकी सक्सेस स्टोरी किसी बॉलीवुड मूवी की तरह है। किसी को पिता की परेशानी ने इंस्पायर किया…कोई लड़कियों के कपड़े सिलने का काम करता था…किसी के पिता भेड़-बकरियों का पालन करते हैं…. पढ़िए- ऐसे ही 8 कैंडिडेट्स की संघर्ष की कहानियां, जो एस्पायरिंग (तैयारी कर रहे) कैंडिडेट्स को मोटिवेट करेंगी। जयपुर विकास चौधरी (रैंक-34) 1- पिता की परेशानी देख RAS बनने की ठानी जयपुर के मानसरोवर के रहने वाले विकास चौधरी ने RAS-2024 में 34वीं रैंक हासिल की है। विकास ने बताया कि मुझे RAS बनने की प्रेरणा खुद से मिली। पिताजी का जमीन से जुड़ा विवाद रहा है। बचपन से देखता था कि वे SDM ऑफिस जाते थे तो परेशान हो जाते थे। कई बार कहते थे कि अगर घर में कोई SDM होता तो परेशानी नहीं होती। मैंने घर में ही समस्याएं देखीं और समझा कि प्रशासनिक अधिकारी किस तरह लोगों की मदद कर सकते हैं। मुझे लगा कि मेरे पिताजी जैसे कई लोग होंगे जो परेशान होते होंगे। ऐसे लोगों की मदद कैसे की जा सकती है। इसी सोच के साथ मैंने तैयारी शुरू की। तैयारी के दौरान मैंने कोचिंग में कॉपी चेक करने का काम भी किया और साथ ही अपनी पढ़ाई जारी रखी। RAS-2023 में आई थी 23वीं रैंक विकास ने बताया कि 2020 से RAS की तैयारी कर ली थी। RAS-2021 में 1010वीं रैंक हासिल की थी। इसके बाद RAS-2023 में 23वीं रैंक हासिल की और वर्तमान में ओटीएस से ट्रेनिंग ले रहे हैं। विकास ने बताया कि पिताजी किसान हैं और मां हाउस वाइफ हैं। परिवार में कोई किसान और पशुपालक। इंटरव्यू में ईमानदारी से जवाब देने पर मिले अच्छे नंबर इंटरव्यू में सवाल पूछा गया था कि- बीकानेर लोकेंद्र सिंह (रैंक-33) 2- पैसों की तंगी थी, कोचिंग करना मुश्किल था बीकानेर के एक छोटे से गांव छनेरी से आने वाले लोकेंद्र सिंह की 33वीं रैंक आई है। RAS-2023 में मेरी 620 रैंक आई थी। तब कोई सर्विस एलोकेट नहीं हो पाई थी। घरवालों को भरोसा था कि अगली बार जरूर हो जाएगा। लोकेंद्र ने बताया कि RAS बनने में सबसे बड़ी परेशानी पैसों की थी। पिता भेड़-बकरी पालन का काम करते हैं। घर की आर्थिक हालत इतनी अच्छी नहीं है। ऐसे में कोचिंग करना तो दूर, जयपुर में रहकर पढ़ाई करना भी मुश्किल था। बड़े भाई को अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ गई थी। जीजाजी राजेंद्र सिंह (आर्मी से रिटायर्ड ) ने कोचिंग की फीस दी, तब जयपुर में एडमिशन लिया। पिता भेड़-बकरी बेचकर 3 से 4 महीने में एक बार ही पैसा भेज पाते थे। गांव वाले भी पापा से कहते थे कि इतना बड़ा एग्जाम है। पटवारी, LDC या आर्मी की ही तैयारी करवा लो लेकिन पिता ने मुझे आजादी दी। उन्होंने कहा कि पैसे की चिंता मत कर, हम इंतजाम करेंगे। बकरी बेचने से जो पैसे आते थे, उसका करीब 80% मेरी पढ़ाई पर खर्च हो जाता था, फिर भी पिताजी कहते थे कि तू पढ़ाई कर, खर्च हम देख लेंगे। मेरे गांव का नाम लोग नहीं जानते थे लोकेंद्र ने बताया कि उनके गांव में करीब 100 घर है। स्कूल भी आठवीं तक ही है। जब आस-पास के लोग दूसरे गांवों में जाते थे। तब लोग गांव का नाम सुनते ही कहते थे कि, ये कहां है। तब मुझे लगता था कि हमारे गांव का नाम सब जाने। गांव में केवल 2 से 3 लोग ही सरकारी नौकरी में हैं। RAS में चयन होने वाले वे अपने गांव के पहले लड़के हैं। लोकेंद्र सिंह से इंटरव्यू में पूछे गए सवाल जोधपुर ग्रामीण दिनेश कुमार (रैंक-7) 3- माता-पिता कभी स्कूल नहीं गए, पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया जोधपुर ग्रामीण के रहने वाले दिनेश कुमार की RAS-2024 में 7वीं रैंक हैं। इनकी 2023 में 31वीं रैंक आई थी। वर्तमान में ओटीएस से ट्रेनिंग ले रहे हैं। दिनेश ने बताया कि उनके माता-पिता कभी स्कूल नहीं गए, लेकिन उन्होंने हमेशा पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। परिवार में माता-पिता, बड़ी बहन और तीन भाई हैं। दिनेश ने बताया कि 2017 में बीएसटीसी किया था। 2018 की वैकेंसी के जरिए 2019 में टीचर बन गया था। करीब पांच साल तक टीचर के रूप में काम करते हुए ही RAS की तैयारी शुरू की थी। इंटरव्यू में नौकरी और विषय से जुड़े सवाल पूछे गए जोधपुर महेंद्र भाटी (रैंक- 72) 4- लेडिज कपड़ों की सिलाई के साथ पढ़ाई की जोधपुर के रहने वाले महेंद्र भाटी ने RAS-2024 में 72वीं रैंक हासिल की है। महेंद्र ने बताया कि यह उनका दूसरा प्रयास था। इससे पहले 2023 में उनकी 1323वीं रैंक आई थी। महेंद्र ने बताया कि उनका पूरा परिवार सिलाई का काम करता है। पापा, मम्मी, भाई और भाभी सभी सिलाई करते हैं। वे खुद भी इस काम से जुड़े रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे पढ़ाई के साथ-साथ लेडीज कपड़ों की सिलाई करते थे। इंटरव्यू में पूछा- कढ़ी और खाटे में क्या अंतर है? महेंद्र ने बताया कि उन्होंने ग्रेजुएशन पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में किया था, जिसके बाद जॉब भी की। इस दौरान उनके एक दोस्त का चयन RAS अधिकारी के तौर पर हुआ, जिससे मोटिवेशन मिला और RAS की तैयारी शुरू कर दी। महेंद्र ने बताया कि दोनों बार इंटरव्यू बहुत अच्छा रहा था। इंटरव्यू में कढ़ी और खाटे में अंतर पूछा गया। इसके अलावा जनरल नॉलेज और जनरल अवेयरनेस से जुड़े सवाल भी शामिल रहे। धौलपुर अरिमर्दन सिंह चौहान (रैंक-65) 5- नौकरी छोड़कर RAS की तैयारी की धौलपुर के रहने वाले अरिमर्दन सिंह चौहान ने RAS परीक्षा 2024 में 65वीं रैंक हासिल की है। यह उनका तीसरा प्रयास था। इससे पहले 2021 में उनकी 768वीं और 2023 में 566वीं रैंक आई थी। अरिमर्दन ने बताया कि उन्होंने 2021 में तैयारी शुरू की थी। अरिमर्दन ने बताया कि 2022 में उनका चयन बिजली विभाग में हुआ था। वे जोधपुर डिस्कॉम में JEN के तौर पर काम कर चुके हैं। वर्तमान में वे कॉरपोरेट इंस्पेक्टर हैं। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के दौरान कई चुनौतियां आईं, लेकिन उनकी पत्नी ने उन्हें पूरा सपोर्ट किया। अरिमर्दन ने बताया कि पिता रिटायर्ड टीचर हैं और मां हाउसवाइफ हैं। परिवार में उनकी चार बहनें हैं, जो एजुकेशन सेक्टर में टीचिंग लाइन में हैं। उनका छोटा भाई LIC में ब्रांच मैनेजर है। परिवार में पढ़ाई का माहौल होने के कारण उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मिलती रही। श्रीगंगानगर छायांक चावला (रैंक-270) 6- तीन साल की मेहनत का परिणाम है ये सक्सेस श्रीगंगानगर के रहने वाले छायांक चावला ने RAS-2024 में 270वीं रैंक हासिल की है। यह उनका दूसरा प्रयास था। इससे पहले 2023 में उनकी 515वीं रैंक आई थी। फिलहाल वे कॉरपोरेट इंस्पेक्टर के तौर पर ट्रेनिंग ले रहे हैं। छायांक ने बताया कि वे पिछले तीन साल से जयपुर में रहकर लगातार तैयारी कर रहे थे। छायांक ने बताया कि माता-पिता दोनों सरकारी टीचर है। उनकी बहन भी फर्स्ट ग्रेड टीचर है। इंटरव्यू में पूछे ये सवाल- पाली राजपाल सिंह राठौर (रैंक-388) 7- कई बार निराशा होती, फिर ओवरकम करके पढ़ाई करता था पाली के रहने वाले राजपाल सिंह राठौड़ ने RAS-2024 में 388वीं रैंक हासिल की है। यह उनकी तीसरी कोशिश थी। राजपाल ने बताया कि उनकी मां हाउसवाइफ हैं और पिता एडवोकेट हैं। उन्होंने बताया कि वे 2021 से जयपुर में रहकर RAS की तैयारी कर रहे हैं। राजपाल ने बताया कि तैयारी के दौरान कई बार चीजें ठीक नहीं होती थीं, जिससे काफी बुरा लगता था। दो-तीन दिन तक निराशा रहती थी। फिर खुद को संभालकर आगे बढ़ना ही सबसे बड़ा चैलेंज होता था। उन्होंने इसी को ओवरकम करते हुए अपनी तैयारी जारी रखी। इंटरव्यू में इंटरनेशनल रिलेशंस के भी सवाल पूछे गए राजपाल ने बताया कि उनका इंटरव्यू काफी अच्छा रहा। इंटरव्यू में उनसे राजस्थान के कलर, इंटरनेशनल रिलेशंस और जियोपॉलिटिक्स से जुड़े सवाल पूछे गए। इसके साथ ही ट्रंप टैरिफ को लेकर भी सवाल किया गया कि यह दुनिया को किस तरह प्रभावित कर रहा है और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ रहा है। सीकर वीरेंद्र गढ़वाल (रैंक-22) 8- पत्नी ने शादी से पहले RAS एग्जाम देने के लिए कहा था सीकर के वीरेंद्र गढ़वाल की 22वीं रैंक है। वीरेंद्र ने बताया- 2018 में दिल्ली मेट्रो में जूनियर इंजीनियर थे। इसी दौरान एक दिन संचिता से मुलाकात हुई। मुलाकात के बाद दोनों की दोस्ती हो गई। धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे को जानने लगे। इसी बीच संचिता ने वीरेंद्र से कहा कि जूनियर इंजीनियर की पोस्ट तुम डिजर्व नहीं करते। मेहनत करो और सिविल सर्विस की तैयारी करो। इसी बीच वीरेंद्र ने 2021 में राजस्थान गवर्नमेंट का एग्जाम दिया। जलदाय विभाग में सहायक इंजीनियर बन गए। साल 2022 में वीरेंद्र और संचिता ने शादी करने का फैसला किया, लेकिन संचिता ने पहले सिविल सर्विस एग्जाम के लिए मोटिवेट किया। संचिता ने कहा- रिजल्ट जो भी होगा, वो हमेशा उनके साथ हैं। वीरेंद्र ने आरएएस 2023 की परीक्षा दी।। लगातार पढ़ाई जारी रखी। 2025 में रिजल्ट आया तो वीरेंद्र की 162वीं रैंक आई। जिला परिवहन अधिकारी के लिए जयपुर के OTS में ट्रेनिंग शुरु कर दी। इसी बीच वीरेंद्र और संचिता ने 18 फरवरी 2025 को शादी भी कर ली। …. 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