राज्य में दो वर्ष में औद्योगिक निवेश को लेकर राइजिंग राजस्थान सहित कई आयोजन हुए और निवेश को प्रोत्साहन दिया गया। उद्योग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का कहना है कि उद्योगों का बढ़ना राज्य की लाइफलाइन तय करता है। यह एक आर्थिक चक्र का हिस्सा है, जो प्रत्येक व्यक्ति, प्रत्येक परिवार को प्रभावित करता है। पढि़ए उद्योग मंत्री राठौड़ से बातचीत के प्रमुख अंश- उद्योग आने से जिंदगी में क्या बदलने वाला है? महत्वपूर्ण प्रश्न का सीधा उत्तर है। उद्योग का मतलब केवल बड़ी कंपनियां नहीं, बल्कि स्थानीय परिवारों की बेहतर जिंदगी है। जब किसी क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधि बढ़ती है तो केवल एक फैक्ट्री नहीं खुलती। उसके साथ ट्रांसपोर्ट, ढाबे, दुकानदार, छोटे सप्लायर, वेल्डर, इलेक्ट्रिशियन, पैकेजिंग फर्म, किराए के मकान, स्थानीय सेवाएं... पूरा एक आर्थिक चक्र शुरू होता है। एक नौकरी सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं बदलती, वह पूरे परिवार का आत्मविश्वास बदलती है। हम चाहते हैं कि राजस्थान का युवा यह महसूस करे कि उसे आगे बढ़ने के लिए राज्य छोड़ना मजबूरी न बने। अवसर उसके अपने जिले, अपने शहर, अपने क्षेत्र में भी बनें। भास्कर : कई औद्योगिक क्षेत्र घोषित किए, उद्योग नहीं लगे? राज्य में औद्योगिक निवेश की गति कहां तक पहुंच रही और सरकार कैसे काम कर रही है, इस पर उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से सीधी बात उद्योग की बात सब सरकारें करती हैं, आपकी सरकार में अलग क्या है? अंतर नीयत और निष्पादन में दिखता है। सरकार की गंभीरता और सिस्टम की गति। हमने दोनों पर काम किया है। जब नीति जमीन पर उतरती है, तभी निवेश कागज से निकलकर रोजगार बनता है। औद्योगिक निवेश में महंगी जमीनें बाधा हैं? कोई सुधार की गुंजाइश? हमने आज रीको के माध्यम से दो वर्षों में 3,055 औद्योगिक प्लॉट आवंटित किए हैं, जो उससे पहले के दो वर्षों की तुलना में करीब 45% अधिक हैं। हमारे पास ऐसे आंकड़े भी हैं जहाँ 880 से बढ़कर 2,175 प्लॉट आवंटित हुए और रीको का लाभ 1910 करोड़ रुपए से बढ़कर 3002 करोड़ रुपए तक पहुंचा। इसका मतलब है कि जमीन रुकी नहीं, उद्योग आगे बढ़ा। कई औद्योगिक क्षेत्र बनाए, उद्योग नहीं लगे, क्यों? हमने कम उपयोग वाली औद्योगिक भूमि को 60% रिजर्व प्राइस पर उपलब्ध कराया है। इसमें बड़ी संख्या में निवेश आया है। साथ ही 33 नए औद्योगिक क्षेत्र खोले और कई जगह पर भूमि उपयोग की बाधाएं हटाई हैं। यह सब इसलिए ताकि निवेशक को लगे कि राजस्थान केवल कह नहीं रहा, रास्ता भी बना रहा है। उद्योग, आईटी, खेल, युवा, कौशल और सैनिक कल्याण की कार्यशैली किस तरह तय करते हैं? मेरे लिए ये विभाग अलग-अलग फाइलें नहीं हैं। ये राजस्थान के भविष्य की एक जुड़ी हुई तस्वीर हैं। इसलिए हमारी सोच बहुत साफ है उद्योग आएगा तो रोजगार आएगा, स्किल होगी तो युवा तैयार होगा, आईटी जुड़ेगा तो व्यवस्था तेज होगी, खेल बढ़ेगा तो आत्मविश्वास बढ़ेगा और सैनिक का सम्मान होगा तो समाज में राष्ट्र भावना और अनुशासन दोनों मजबूत होंगे।