चित्तौड़गढ़ जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत सरकारी गेहूं के गबन के दो मामलों में रसद विभाग ने आखिरकार सख्त कार्रवाई करते हुए शंभूपुरा थाने में एफआईआर दर्ज करवाई हैं। दोनों मामलों में कुल 473.47 क्विंटल (47,347 किलो) गेहूं के गबन का आरोप है। इनमें चिकसी की उचित मूल्य दुकान से 232.95 क्विंटल और गिलूंड की उचित मूल्य दुकान से 240.52 क्विंटल गेहूं गायब मिला। विभाग ने पहले दोनों दुकानों की आकस्मिक जांच की, फिर अनियमितताएं मिलने पर उन्हें निलंबित किया। इसके बाद चार्ज हस्तांतरण के दौरान स्टॉक का मिलान किया गया तो भारी मात्रा में सरकारी गेहूं गायब मिला। दोनों डीलरों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया, लाइसेंस भी निरस्त किए गए और सरकारी गेहूं वापस जमा कराने का मौका भी दिया गया, लेकिन तय समय तक गेहूं वापस नहीं लौटाया गया। इसके बाद प्रवर्तन अधिकारी ने दोनों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करवाई। लोगों ने कहा- अंगूठे लगवाए, लेकिन राशन नहीं मिला पहला मामला चित्तौड़गढ़ तहसील के चिकसी गांव की उचित मूल्य दुकान (पीओएस कोड 31047) का है, जिसका संचालन गौरव सरगरा कर रहा था। 23 मई 2025 को रसद विभाग की टीम ने दुकान पर आकस्मिक जांच की तो दुकान बंद मिली। अधिकारियों ने डीलर से संपर्क करने के लिए मोबाइल पर कॉल किया, लेकिन उसका फोन भी बंद मिला। मौके पर मौजूद उपभोक्ताओं ने अधिकारियों को बताया था कि राशन डीलर पहले उनके घर जाकर ई-पीओएस मशीन पर अंगूठे लगवा लेता था, लेकिन बाद में राशन नहीं देता था। विभाग ने इसे पात्र उपभोक्ताओं का सरकारी राशन रोककर निजी लाभ लेने का मामला माना। जांच में राजस्थान खाद्यान्न एवं अन्य आवश्यक पदार्थ (वितरण का विनियमन) आदेश-1976 और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश-2015 के प्रावधानों का उल्लंघन सामने आने पर 18 जून 2025 को दुकान को निलंबित कर दिया गया था। चार्ज सौंपते समय पूरा स्टॉक मिला था गायब निलंबन के बाद जब दुकान का चार्ज दूसरे डीलर को सौंपा गया तो पीओएस मशीन में 232.95 क्विंटल गेहूं का स्टॉक दर्ज था, जबकि मौके पर एक भी किलो गेहूं उपलब्ध नहीं मिला। विभाग ने इसे सरकारी गेहूं का गबन माना। इसके बाद 10 अक्टूबर 2025 को गौरव सरगरा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। उसने अपने जवाब में कहा कि निरीक्षण के समय मोबाइल डिस्चार्ज था। साथ ही उसने बीमार और बुजुर्ग उपभोक्ताओं के घर जाकर अंगूठे लगाने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि ऐसा उन्हें राशन देने के उद्देश्य से किया गया था। उसने पारिवारिक समस्याओं के कारण वितरण काम प्रभावित होने की भी बात कही। हालांकि जांच अधिकारी की रिपोर्ट, उपलब्ध डॉक्यूमेंट्स और चार्ज हस्तांतरण के रिकॉर्ड के आधार पर विभाग ने उसके जवाब को असंतोषजनक माना। विभाग ने माना कि पात्र उपभोक्ताओं को गेहूं नहीं देकर उसका निजी लाभ के लिए दुरुपयोग किया गया। इसके बाद 19 मार्च 2026 को जिला रसद अधिकारी ने उसका प्राधिकार पत्र (लाइसेंस) निरस्त कर दिया। लाइसेंस रद्द होने के बाद भी उसे सरकारी गेहूं वापस जमा कराने का अवसर दिया गया, लेकिन तय अवधि तक गेहूं वापस नहीं लौटाया गया। इसके बाद शुक्रवार को एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू की गई। महीने में दो-तीन दिन खुलती थी दुकान, 240.52 क्विंटल गेहूं गायब मिला दूसरा मामला गिलूंड गांव की उचित मूल्य दुकान (पीओएस कोड 31354) का है, जिसका संचालन जनक कंवर कर रही थी। 7 मई 2025 को रसद विभाग ने यहां आकस्मिक जांच की तो दुकान बंद मिली। मौके पर मौजूद उपभोक्ताओं ने अधिकारियों को बताया था कि राशन की दुकान महीने में सिर्फ दो-तीन दिन ही खोली जाती है, जिससे उन्हें समय पर राशन नहीं मिल पाता। जांच में विभाग ने माना कि पात्र उपभोक्ताओं को राशन का नियमित वितरण नहीं किया गया और सरकारी अनाज का निजी लाभ के लिए दुरुपयोग किया गया। अनियमितताएं मिलने पर 18 जून 2025 को दुकान को निलंबित कर दिया गया। 25,436 किलो स्टॉक दर्ज था, लेकिन मिला सिर्फ 1,384 किलो निलंबन के बाद जब दुकान का चार्ज दूसरे डीलर को दिया गया तो पीओएस मशीन में 25,436 किलो गेहूं दर्ज था, जबकि मौके पर सिर्फ 1,384 किलो गेहूं ही मिला। यानी 24,052 किलो (240.52 क्विंटल) गेहूं गायब था। विभाग ने इसे सरकारी गेहूं का गबन माना। इसके बाद 10 अक्टूबर 2025 को जनक कंवर को नोटिस जारी किया गया। जवाब में उसने कहा था कि निरीक्षण के दिन पारिवारिक समारोह होने के कारण दुकान बंद थी। लेकिन जांच अधिकारी की रिपोर्ट, डॉक्यूमेंट्स और स्टॉक मिलान के आधार पर विभाग ने इस जवाब को भी संतोषजनक नहीं माना। विभाग का निष्कर्ष रहा कि पात्र उपभोक्ताओं को मिलने वाला सरकारी गेहूं निजी लाभ के लिए उपयोग किया गया। इसके बाद 19 मार्च 2026 को जिला रसद अधिकारी ने उसका प्राधिकार पत्र भी निरस्त कर दिया। लाइसेंस निरस्त होने के बाद विभाग ने सरकारी गेहूं वापस जमा कराने का मौका दिया, लेकिन गेहूं वापस नहीं लौटाया गया। अब दोनों डीलरों पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस करेगी जांच जिला रसद अधिकारी ने दोनों मामलों में अलग-अलग कर शंभूपुरा थाने में एफआईआर दर्ज करवाया है। यह दोनों मामले प्रवर्तन अधिकारी सुमन तिवारी ने दर्ज करवाया है। विभाग का कहना है कि दोनों राशन डीलरों ने राजस्थान खाद्यान्न एवं अन्य आवश्यक पदार्थ (वितरण का विनियमन) आदेश-1976 के तहत जारी प्राधिकार पत्र की शर्तों के साथ-साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश-2015 का उल्लंघन किया है।