बॉलीवुड एक्ट्रेस रवीना टंडन ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज विषय अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहा। बढ़ती गर्मी, असामान्य बारिश, ओलावृष्टि और बदलता मौसम प्रकृति के बिगड़ते संतुलन के संकेत हैं। उन्होंने कहा कि हम कृत्रिम तरीके से ऑक्सीजन बना सकते हैं, लेकिन जीवन सिर्फ ऑक्सीजन से नहीं चलता। हमारी दवाइयां, भोजन और पूरा अस्तित्व पेड़ों पर टिका है। रवीना ने युवाओं से पर्यावरण बचाने की अपील की। वहीं राजस्थान में बढ़ते डेस्टिनेशन वेडिंग ट्रेंड पर रवीना ने कहा कि हमारी शादी के बाद से ही ये ट्रेंड बढ़ा है, लेकिन हमारा राजस्थान को चुनने के पीछे का उद्देश्य शादी को निजी और सादगीपूर्ण रखना था। दरअसल, रवीना टंडन ‘वृक्ष मित्र सम्मान समारोह’ में शामिल होने जयपुर आई थी। इस दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर के साथ खास बातचीत में पर्यावरण संरक्षण, राजस्थान से अपने भावनात्मक जुड़ाव, डेस्टिनेशन वेडिंग के बढ़ते ट्रेंड और ओटीटी प्लेटफॉर्म के दौर में मनोरंजन जगत में आए बदलावों पर खुलकर अपनी राय रखी। यह कार्यक्रम कल शाम एक होटल में हुआ। रवीना अभी जयपुर में ही हैं। सवाल: आप पर्यावरण संरक्षण को लेकर क्या संदेश देना चाहेंगी? रवीना टंडन: देखिए, मेरा संदेश बहुत सीधा और बहुत जरूरी है। हमारी पूरी इंसानियत, हमारी पूरी प्रजाति, हमारा पूरा जीवन वृक्षों के बिना संभव ही नहीं है। हमारा पूरा अस्तित्व, हमारा पूरा सस्टेनेंस वृक्षों पर टिका है। क्लाइमेट चेंज अब कोई किताबों का विषय नहीं रहा, हम सब उसे अपनी आंखों से देख रहे हैं। दिल्ली में कल ओलावृष्टि हुई, कहीं तापमान रिकॉर्ड तोड़ रहा है, कहीं मौसम अचानक बदल रहा है। यह सब हमें चेतावनी दे रहा है। दुख की बात यह है कि जब पेड़ कटते हैं, जंगल उजड़ते हैं, तब बहुत कम लोग आवाज उठाते हैं। इसलिए मैं खासतौर पर युवाओं से कहना चाहती हूं कि उन्हें आगे आना होगा, बोलना होगा और प्रकृति के पक्ष में खड़ा होना होगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की बात करना विकास का विरोध नहीं है। डवलपमेंट और एन्वायरमेंट साथ-साथ चल सकते हैं। जहां सड़कें बनानी हैं, बनाइए, लेकिन इस तरह बनाइए कि जंगल बचे रहें, वन्यजीवों का रास्ता न रुके। विकास ऐसा हो जो प्रकृति को साथ लेकर चले, न कि उसे कुचलकर। रवीना टंडन ने कहा कि मैं खुद अपनी संस्था के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में काम कर रही हूं, जहां बफर जोन्स और जंगलों के आसपास की जमीन को वापस हरित क्षेत्र में बदला जा सके। लेकिन यह सिर्फ एक-दो लोगों की जिम्मेदारी नहीं है, यह हम सबकी जिम्मेदारी है। अगर हम आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्राकृतिक आपदाओं से जूझती दुनिया देने वाले हैं, तो हमें खुद से पूछना चाहिए कि हम अपने बच्चों के लिए कैसी धरती छोड़कर जा रहे हैं। इसलिए हर नागरिक को व्यक्तिगत स्तर पर पेड़ लगाने होंगे। यह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व का सवाल है। सवाल: राजस्थान से आपका जुड़ाव कितना खास है? रवीना टंडन: राजस्थान से मेरा रिश्ता बहुत ही भावनात्मक है। मैं हमेशा कहती हूं कि किसी न किसी जन्म में मेरा राजस्थान से जरूर कोई गहरा नाता रहा होगा। यहां की मिट्टी, यहां की संस्कृति, यहां की विरासत, यहां का अपनापन मुझे हमेशा अपनी ओर खींचता है। यहां आकर हमेशा एक अपनापन महसूस होता है। सवाल: आपकी शादी के बाद राजस्थान में सेलेब्रिटी डेस्टिनेशन वेडिंग का ट्रेंड बढ़ा है, आपने क्या सोचकर राजस्थान चुना था? रवीना टंडन: मुझे तो लगता है, इसके लिए मुझे होटल वालों से कमिशन मिलना चाहिए, लेकिन मजाक से हटकर कहूं तो जब हमने राजस्थान को अपनी शादी के लिए चुना था, तब हमारा मकसद सिर्फ इतना था कि शादी बहुत निजी और सादगीभरी हो। हम नहीं चाहते थे कि वह कोई पब्लिक स्पेक्टेकल बने, जहां हजारों लोग हों और सब कुछ दिखावे में बदल जाएं। हम चाहते थे कि हमारे सबसे करीबी, अपने लोग हमारे साथ हों और शादी एक निजी, आत्मीय और यादगार अनुभव बने। उसी सोच के साथ हमने राजस्थान को चुना। अब अगर वह एक ट्रेंड बन गया है, तो यह राजस्थान की खूबसूरती, शाही माहौल और इसकी गर्मजोशी की वजह से है। राजस्थान में वो चार्म है, जो लोगों को नेचुरली अपनी ओर खींचता है। सवाल: आपके आने वाले प्रोजेक्ट्स को लेकर क्या अपडेट है? रवीना टंडन: हां, इस समय मेरे पास चार-पांच प्रोजेक्ट हैं, जिन पर काम चल रहा है। बहुत जल्द दर्शकों को वे देखने को मिलेंगे। कुछ प्रोजेक्ट बेहद दिलचस्प हैं और मुझे उम्मीद है कि दर्शकों को पसंद आएंगे। सवाल: ओटीटी और वेबसीरीज का दौर तेजी से बढ़ा है। आप इसे किस तरह देखती हैं? रवीना टंडन: मुझे लगता है ओटीटी ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को बहुत बड़ा और जरूरी मंच दिया है। ओटीटी के आने से थिएटर्स पर थोड़ा दबाव जरूर आया है, लेकिन मेरा मानना है कि अगर फिल्म अच्छी होगी तो दर्शक उसे थिएटर में जरूर देखेंगे। अच्छी फिल्मों का अपना आकर्षण हमेशा रहेगा। जहां तक OTT का सवाल है, उसने बहुत सारे कलाकारों को नए मौके दिए हैं। ऐसे कई कलाकार, जिन्हें शायद पहले उतने अवसर नहीं मिलते थे, उन्हें OTT ने नई पहचान दी। हम जैसे कलाकारों को भी नए तरह के किरदार और नए प्लेटफॉर्म मिले। इसलिए मुझे लगता है कि OTT और थिएटर, दोनों का साथ रहना बहुत जरूरी है। दोनों का अपना महत्व है और दोनों को साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए।