आमजन को फ्रॉड से बचाने के लिए सरकार की बनाई राजस्थान रियल एस्टेट रेगुले​टिरी ऑथोरिटी (रेरा) बिल्डरों के आगे पंगु बन गई है। रेरा ऑथोरिटी आमजन को बिल्डरों से न तो ​समय पर फ्लैट दिलवा पा रही और न ही जमा राशि। रेरा कोर्ट से जो आदेश पारित हो रहे हैं, उन आदेशों की पालना भी बिल्डर अब नहीं कर रहे। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार ने जिस उद्देश्य से इस ऑथोरिटी का गठन किया। अब उसका क्या औचित्य है? दरअसल जयपुर के शाहपुरा स्थित वार्ड नं: 3 में बिल्डर प्रभात ड्रीम रियल स्टेट ने मुख्यमंत्री जनआवास योजना के तहत ‘’गिन्नी होम्स'' नाम से ग्रुप हाउसिंग की योजना प्रस्तावित की। इसके लिए साल 2019 में आवेदन मांगे और लॉटरी करके फ्लैटों का आवंटन किया। सफल आवेदकों को डिमांड जारी करके रुपए तो ​ले लिए, लेकिन करीब 6 साल से ज्यादा समय हो गया, अब तक फ्लैट तैयार करके कब्जा नहीं दिया। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट में 250 से ज्यादा लोगों को फ्लैट्स का आवंटन किया गया है। कोर्ट ने पैसे देने के लिए कहा, लेकिन नहीं दिए फ्लैट का कब्जा नहीं देने पर सफल आवेदकों का एक ग्रुप रेरा कोर्ट गया। जहां अमरचंद सैनी और अन्य के नाम से रेरा कोर्ट में इस मामले में याचिका लगाई। कोर्ट में सुनवाई के बाद दिसंबर 2023 में आदेश जारी करते हुए बिल्डर प्रभात ड्रीम रियल स्टेट को परिवादी के सभी जमा रुपए 10.6 प्रतिशत सालाना ब्याज दर के साथ परिवादी को 45 दिन में वापस करने के आदेश दिए। वहीं बिल्डर ने इन आदेशों की भी पालना नहीं की। बार-बार नोटिस देने के बाद भी पालना नहीं पीड़ितों ने बताया- 2 महीने तक रुपए नहीं मिलने पर हमने फिर रेरा कोर्ट में आवेदन किया। कोर्ट ने आदेशों की पालना करने के लिए बिल्डर को 2 से 3 बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन तब भी बिल्डर ने कोई जवाब पेश नहीं किया। यही नहीं कोर्ट में पैरवी के लिए भी अपना वकील नहीं भेजा। अब रेरा कोर्ट ने इस मामले में रकम वसूली के लिए जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर सहायता मांगी है।