दीपावली पर घरों को रोशन करने वाले मिट्टी के दीपक बनाने वाले कुम्हार परिवारों की मेहनत और स्वाभिमान को सम्मान देने की अनूठी पहल की गई। नगर परिषद की पूर्व सभापति नगर परिषद लक्ष्मी जैन के साथ नेतृत्व में महिलाओं ने दीपक बनाने वाले कुम्हारों व उनके परिवारों का पारंपरिक राजस्थानी साफा पहनाकर स्वागत और सम्मान किया। दीपावली पर मिट्टी के दीपक खरीदने के साथ बिना मोलभाव उनकी उचित कीमत देने की अपील करते हुए लक्ष्मी जैन ने कहा कि बड़े-बड़े शोरूम और होटलों में हजारों रुपए खर्च करते समय लोग मोलभाव नहीं करते, लेकिन मिट्टी के दीपक खरीदते समय कुम्हारों से भाव-ताव करते हैं। मिट्टी के दीपक केवल रोशनी का साधन नहीं, बल्कि हमारी सदियों पुरानी संस्कृति और परंपरा के प्रतीक हैं। जैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय कारीगरों के उत्पाद अपनाना और उन्हें प्रोत्साहित करना सभी की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश की पारंपरिक कला और छोटे कारीगरों को बढ़ावा देने की भावना को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। इस दौरान रिचा सिंगल, मंजू गुप्ता, कमलेश, सरिता, सुनीता, उषा, खुशी, कामिनी, कविता, नीलिमा, पुष्पा, लक्ष्मी विजय, ज्योति, अंजू, मंजू विजय एवं संजू सहित महिलाओं ने भाग लिया। सभी ने कुम्हार परिवारों का सम्मान कर स्थानीय उत्पादों को अपनाने और पारंपरिक कारीगरी को संरक्षण देने का संदेश दिया। स्थानीय कारीगरों को मिलेगा रोजगार : वोकल फॉर लोकल केवल नारा नहीं, बल्कि हर घर का संकल्प बनना चाहिए। स्थानीय कारीगरों से मिट्टी के दीपक खरीदने से उनकी कला को प्रोत्साहन मिलेगा और परिवारों की आजीविका मजबूत होगी। यदि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए भारतीय संस्कृति और मिट्टी के दीपकों की परंपरा को जीवित रखना चाहते हैं तो कुम्हारों की मेहनत और स्वाभिमान का सम्मान करना होगा। इस दीपावली दीपक के साथ किसी परिवार की खुशहाली भी खरीदें। एक दीपक कुम्हार परिवार की खुशहाली के नाम : लक्ष्मी जैन ने कहा कि इस दीपावली हर परिवार मिट्टी के दीपक खरीदे और अनावश्यक मोलभाव से बचे। दीपक की कीमत उसकी मिट्टी से नहीं, बल्कि उसे आकार देने वाले हाथों की मेहनत से तय होनी चाहिए। उन्होंने अपील की कि एक दीपक अपने घर के लिए जलाएं तो एक दीपक कुम्हार परिवार की खुशहाली के नाम भी जलाएं। दीपावली से है उम्मीद : कुम्भ कर विष्णु प्रजापत ने बताया कि दीपक बनाने में पूरे परिवार एक डेढ़ माह से मेहनत करनी पड़ती है। ग्राहक मोलभाव कर कीमत कम करवाते हैं तो मेहनत के अनुरूप आमदनी नहीं हो पाती। लेकिन हर साल इस दीपावली उम्मीद है कि लोग मिट्टी के दीपक खरीदेंगे और बिना मोलभाव उचित कीमत देकर हमारी मेहनत का सम्मान करेंगे।