स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की आरटीआई रिपोर्ट ने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (सुविवि) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों और भू-माफियाओं के बीच के गठजोड़ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। विश्वविद्यालय के भविष्य के लिए वर्ष 1981 में अवाप्ति अधीन की गई चंपा बाग और निरंजनी अखाड़ा की 14.5900 हेक्टेयर (1,56,988.4 वर्गफीट) जमीन पर रसूखदारों ने अवैध कॉलोनियां, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट और बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दीं। जून 2025 की उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) की न्यूनतम आवासीय नीलामी दर 8,000 रुपए प्रति वर्गफीट के आधार पर इस घोटाले से विश्वविद्यालय को 12,55,90,72,000 रुपए (करीब 1,255.90 करोड़ रुपए) की भारी-भरकम चपत लगी है। ये जानकारियां आरटीआई में सुविवि के पूर्व छात्र व एडवोकेट शक्ति सिंह भाटी को मिली हैं। इस घोटाले और घोर लापरवाही के सामने आने के बाद निधि अंकेक्षण विभाग ने कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और निजी हित धारकों को फायदा पहुंचाने के आरोप में सुविवि के तत्कालीन तीन भू-सम्पदा अधिकारियों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई कराने के लिए संयुक्त सचिव, उच्च शिक्षा विभाग को मामला भेजा है। कोर्ट के आदेश के बाद भी 5 महीने तक दबाई अवाप्ति की फाइल राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कई स्थगन आदेशों को खारिज करते हुए जमीन पर विश्वविद्यालय का मालिकाना हक पूरी तरह बहाल कर दिया था। इसके बावजूद सुविवि के लापरवाह अधिकारी अवाप्ति की अगली प्रक्रिया के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेजने की फाइल 5 महीने से अधिक (18 दिसंबर 2024 से 24 मई 2025 तक) कुलपति कार्यालय में दबाकर बैठे रहे। ऑडिट दल के कड़े हस्तक्षेप के बाद जून 2025 में जिला कलेक्टर को पत्र भेजा गया, लेकिन तब तक भू-माफियाओं को अवैध निर्माण और डिस्ट्रेस सेल का पूरा मौका मिल चुका था। सुविवि प्रशासन इस विवादित भूमि को जिला प्रशासन से अवाप्त कराने के लिए कानूनी दांवपेंच खेलता आ रहा था, लेकिन जिला प्रशासन ने प्रदेश सरकार को रिपोर्ट भेजकर अवाप्ति राशि करीब 693.33 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि के चलते हाथ खड़े कर दिए हैं। अब सुविवि के पास कोर्ट-सरकार से इस भूमि को वापस लेने के अलावा दूसरा कोई विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है। स्टे के दौरान भी तन गए रिसॉर्ट्स, होटल्स और रेस्त्रां: अंकेक्षण रिपोर्ट के अनुसार चंपा बाग की अवाप्ति अधिसूचना प्रभावी होने के बावजूद भू-माफियाओं ने कानून की धज्जियां उड़ाकर अवैध कॉलोनियां काट दीं। वर्ष 2014 की कई सेल डीड में साफ लिखा गया कि जमीन सुविवि के अवाप्ति चक्र में है, यदि अधिग्रहित हुई तो विक्रेता की जिम्मेदारी नहीं होगी। इसे डिस्ट्रेस सेल दिखाकर स्टांप ड्यूटी की चोरी की गई। स्थगन आदेशों के दौरान भी चम्पाबाग का परकोटा ढहाया गया और वहां धड़ल्ले से अवैध सड़कें निकाली गईं। इसी भूमि पर बिना किसी भू-उपयोग परिवर्तन (कन्वर्जन) के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती रहीं। हद तो तब हो गई जब मास्टर प्लान की 60 फीट सड़क सीमा में आ रहे पक्के निर्माण के बदले तत्कालीन यूआईटी (अब यूडीए) ने 1,98,52,000 रुपए का मुआवजा भी बांट दिया। कानून तोड़ने वालों पर नरमी न बरतें: ऑडिट रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के कनीज़ अहमद बनाम साबुद्दीन मामले का हवाला देते हुए कहा है कि जानबूझकर कानून तोड़ने वालों पर नरमी न बरती जाए और न अवैध निर्माण रेगुलराइज हो। विभाग ने निर्देश दिया है कि अवाप्ति प्रक्रिया को तुरंत लॉजिकल एंड तक पहुंचाया जाए, अन्यथा समय बीतने पर यह अवाप्ति स्वतः निरस्त हो जाएगी। साथ ही यूडीए, नगर निगम और उप-पंजीयक कार्यालय को पत्र लिखकर इस भूमि की रजिस्ट्री, पट्टा वितरण व नामांतरण पर रोक लगाने को कहा गया है।