राजस्थान के सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू की गई 'राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम' (RGHS) को लेकर विरोध जताया है। जिले के प्राथमिक शिक्षकों का कहना है कि नियमित वेतन कटौती के बावजूद उन्हें इलाज नहीं मिल रहा है। ​प्राथमिक अध्यापक संघ (लेवल प्रथम) के पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार हर महीने शिक्षकों के वेतन से RGHS के नाम पर एक निश्चित राशि (अंशदान) अनिवार्य रूप से काट रही है। लेकिन जब किसी शिक्षक या उसके परिवार को इलाज की सख्त जरूरत होती है, तो उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पाता। ​शिक्षकों का कहना है कि वे अपनी मेहनत की कमाई का हिस्सा सरकार को दे रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें केवल 'सिस्टम की नाकामी' मिल रही है। कार्ड दिखाने के बाद भी इलाज के लिए मना करने का आरोप ​प्राथमिक अध्यापक संघ द्वारा जारी पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि कई सूचीबद्ध (Empaneled) निजी अस्पतालों में RGHS कार्ड दिखाने पर भी इलाज देने से मना किया जा रहा है। कई अस्पताल तकनीकी खामियों या भुगतान बकाया होने का हवाला देकर इलाज से बचते हैं। संघ के स्टेट चेयरमैन खेमराज मीणा ने बताया कि समय पर इलाज न मिलने से शिक्षकों को मजबूरी में निजी खर्च पर इलाज कराना पड़ रहा है, जिससे उन पर दोहरी आर्थिक मार पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जब सरकार कर्मचारियों से अनिवार्य रूप से अंशदान ले रही है, तो यह सरकार की जिम्मेदारी है कि उन्हें निर्बाध चिकित्सा सुविधा मिले। व्यवस्था में सुधार न होना कर्मचारियों के साथ अन्याय है। तकनीकी बाधाओं को दूर करने की मांग ​स्टेट चेयरमैन खेमराज मीणा और संघ के अन्य पदाधिकारियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि ​RGHS के तहत आने वाली तकनीकी बाधाओं को तत्काल दूर किया जाए। ​सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी सूचीबद्ध अस्पताल कर्मचारी को इलाज देने से मना न करे।