साइबर ठगों ने बेरोजगार युवाओं और छोटे व्यापारियों की गाढ़ी कमाई लूटने के लिए नया तरीका अपनाया है। नामी और ब्रांडेड कंपनियों की फ्रेंचाइजी, डीलरशिप और डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिलाने का झांसा देकर ठगों ने बीते दो महीनों में राजस्थान में करीब 600 लोगों को अपना शिकार बनाया। ठगों ने ब्रांडेड फूड चेन, शूज कंपनी, रेडीमेड क्लॉथ कंपनी, चश्मा कंपनी, एफएमसीजी और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों की फर्जी वेबसाइट बनाईं। डीलरशिप लेने पर मोटे मुनाफे का गणित समझाया। इसके बाद सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर लोगों से 5 से 10 लाख रुपए तक जमा करवा लिए गए। दो माह में ही ठगों ने 35 से 40 करोड़ रुपए की ठगी कर ली। जिन खातों में सिक्योरिटी राशि जमा हुई, वहां से रकम 10 से 15 अकाउंट में ट्रांसफर की गई पीड़ितों को भरोसा दिलाया कि अप्रैल से उन्हें डिस्ट्रीब्यूटरशिप या एजेंसी का काम सौंप सौंपेंगे। पैसा जमा होने के बाद ठगों ने एक सप्ताह रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, एग्रीमेंट व लोकेशन सर्वे का बहाना बना झूठा आश्वासन दिया। इसके बाद मोबाइल बंद हो गए और फर्जी वेबसाइट्स भी इंटरनेट से गायब हो गईं। जांच में सामने आया कि जिन खातों में सिक्योरिटी राशि जमा करवाई गई। वहां से रकम 10 से 15 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी गई। छोटे कस्बों के साथ-साथ जयपुर के भी कई लोग इस हाईटेक ठगी का शिकार हुए हैं। जयपुर के तीन मामलों से समझिए ठगी का पूरा खेल केस-1. कॉफी चेन की फ्रेंचाइजी के नाम पर अमित से 8 लाख ठगे मानसरोवर निवासी अमित शर्मा कैफे खोलना चाहते थे। उन्होंने इंटरनेट पर एक नामी ब्रांडेड कॉफी चेन की फ्रेंचाइजी के लिए सर्च किया। टोल-फ्री नंबर पर कॉल करने पर ठगों ने खुद को कंपनी का रीजनल मैनेजर बताया। अमित को फर्जी एग्रीमेंट भेजा गया और सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर 8 लाख रुपए जमा करवा लिए गए। ठगों ने कहा था कि 5 अप्रैल को टीम लोकेशन सर्वे करने आएगी, लेकिन एक सप्ताह बाद ही नंबर बंद हो गए। केस- 2. FMCG एजेंसी का लालच देकर सुनीता से 5 लाख लिए वैशाली नगर निवासी सुनीता देवी अपने बेटे के लिए एक प्रतिष्ठित किराना और एफएमसीजी कंपनी की डिस्ट्रीब्यूटरशिप लेना चाहती थीं। ठगों ने उन्हें फोन कर बताया कि जयपुर वेस्ट के लिए कोटा खाली है। फोन पर ही इंटरव्यू का नाटक किया गया और फिर अप्रूवल लेटर मेल कर दिया गया। सुनीता से 5 लाख आरटीजीएस से खाते में ट्रांसफर करवाए। उन्हें 10 अप्रैल से माल की सप्लाई शुरू करने का वादा किया गया था, लेकिन न माल आया और ना ही फोन लगा। केस- 3. इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम के लिए विक्रम ने 10 लाख गंवाए जोबनेर के विक्रम सिंह ने एक बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेस कंपनी की डीलरशिप लेने के लिए आवेदन किया था। ठगों ने विश्वास में लेने के लिए ऑनलाइन कंपनी के फर्जी लेटरहैड पर ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ भेजा। विक्रम से 10 लाख रुपए की रिफंडेबल सिक्योरिटी राशि जमा करवाई गई। उन्हें बताया था कि नए वित्तीय वर्ष के पहले सप्ताह में शोरूम की ब्रांडिंग शुरू हो जाएगी। तय समय पर कॉल किया तो नंबर अस्तित्व में नहीं था।