केन्द्र से पिछले दो माह से रोटावायरस वैक्सीन की आपूर्ति नहीं होने से सरकारी अस्पतालों और टीकाकरण केन्द्रों पर बच्चों का टीकाकरण प्रभावित हो रहा है। दस्त से बचाव के लिए लगने वाली वैक्सीन की कमी से 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का सुरक्षा चक्र टूट रहा है। राजधानी सहित प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अभिभावकों को वैक्सीन के लिए भटकना पड़ रहा है। सरकारी केन्द्रों पर टीका उपलब्ध नहीं होने से अभिभावक मजबूरन निजी अस्पतालों और टीकाकरण केन्द्रों पर 800 से 1000 रुपए खर्च कर वैक्सीन लगवा रहे हैं। इधर, जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आर.एन. सेहरा ने बताया कि बीच-बीच में वैक्सीन की आपूर्ति नहीं होने से दिक्कत का सामना करना पड़ा। पिछले माह 400 डोज मिली थीं। वर्तमान में 98 डोज में से 83 डोज शेष हैं। केंद्र से सप्लाई नहीं होने की पुष्टि, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का टीकाकरण प्रभावित केस-1 - 2 जगह नहीं मिली वैक्सीन मानसरोवर निवासी ढाई माह के रोहिताश को रोटावायरस वैक्सीन लगवाने के लिए गुरुवार को जयपुर के त्रिवेणी नगर स्थित 10 बी स्कीम और गुर्जर की थड़ी डिस्पेंसरी ले जाया गया, लेकिन दोनों जगह वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने से परिजन लौट गए। केस-2 - शहर की डिस्पेंसरियों पर घूमे सांगानेर निवासी साढ़े तीन माह की गुलशन को रोटावायरस वैक्सीन लगवाने के लिए गुरुवार को राजधानी की पांच डिस्पेंसरियों में ले जाया गया, लेकिन कहीं भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं मिली। इसके बाद परिजनों ने मजबूरन 1500 रुपए खर्च कर निजी अस्पताल में टीका लगवाया। देश में हर साल 1000 में से 37 बच्चे पांच साल तक जीवित नहीं रह पाते स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार देश में हर साल जन्म लेने वाले 1000 बच्चों में से लगभग 37 बच्चे पांच वर्ष की आयु तक जीवित नहीं रह पाते। इनमें डायरिया से होने वाली मौतें भी एक प्रमुख कारण हैं। रोटावायरस वैक्सीन के साथ उचित स्वच्छता, हाथ धोने की आदत, ओआरएस और जिंक सप्लीमेंट बच्चों में डायरिया से होने वाली मौतों को कम करने में मददगार हो सकते हैं। देश में रोटावायरस के कारण हर साल 8,72,000 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है, जबकि लगभग 78,000 लोगों की मौत हो जाती है। भास्कर एक्सपर्ट - (डॉ. अशोक गुप्ता और डॉ. तरुण पाटनी) रोटावायरस पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में गंभीर डायरिया का प्रमुख कारण है। यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी) के तहत यह वैक्सीन 6, 10 और 14 सप्ताह की आयु में नि:शुल्क दी जाती है। संक्रमण से तेज दस्त और गंभीर निर्जलीकरण हो सकता है, इसलिए समय पर टीकाकरण जरूरी है। “केन्द्र सरकार की ओर से पिछले दो माह से रोटावायरस वैक्सीन की आपूर्ति नहीं होने से दिक्कत आ रही है। हम बार-बार पत्र लिख रहे हैं।” -डॉ. मधु रतेश्वर, निदेशक (आरसीएच), चिकित्सा विभाग