जैसलमेर में बाइक एक्सीडेंट के बाद बीमा क्लेम देने से इनकार करने वाली चोलामंडलम इंश्योरेंस कंपनी को आखिरकार ग्राहक को पूरी रकम लौटानी पड़ी। जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश के बाद कंपनी ने क्लेम राशि और मुआवजा मिलाकर कुल 48,921 रुपए का भुगतान किया। आयोग ने कंपनी को 45 दिन के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद कंपनी ने समय सीमा के भीतर चेक जमा करा दिया। इसके बाद आयोग ने मामले का निस्तारण कर दिया। एक्सीडेंट के बाद क्लेम देने से किया था इनकार मामले के अनुसार, जैसलमेर निवासी हरीसिंह ने अपनी रॉयल एनफील्ड बाइक का बीमा चोलामंडलम इंश्योरेंस कंपनी से करवाया हुआ था। कुछ समय पहले उनकी बाइक का एक्सीडेंट हो गया था, जिससे बाइक को काफी नुकसान पहुंचा। हरीसिंह ने बाइक की मरम्मत के लिए बीमा कंपनी से क्लेम मांगा, लेकिन कंपनी ने नियम और शर्तों का हवाला देते हुए क्लेम देने से मना कर दिया। कंपनी के इस फैसले के बाद हरीसिंह ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई। आयोग ने माना सेवा में लापरवाही मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पवन कुमार ओझा और सदस्य रमेश कुमार गौड़ की बेंच ने की। दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें और डाक्यूमेंट्स देखने के बाद आयोग ने माना कि बीमा कंपनी ने सेवा देने में लापरवाही बरती है। आयोग ने हरीसिंह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को बाइक क्लेम के 38,921 रुपए और मानसिक व आर्थिक परेशानी के मुआवजे के तौर पर 10,000 रुपए देने के आदेश दिए। इस तरह कुल 48,921 रुपए का भुगतान करने का निर्देश दिया गया। 45 दिन में भुगतान नहीं करने पर ब्याज की चेतावनी आयोग ने कंपनी को भुगतान के लिए 45 दिन का समय दिया था। साथ ही कहा था कि तय समय में रकम नहीं चुकाने पर कंपनी को पूरी राशि पर 9 फीसदी सालाना ब्याज भी देना होगा। आयोग के निजी सचिव सुधांश सोनी ने बताया कि मामले की आखिरी सुनवाई 22 मई 2026 को हुई थी। आयोग के आदेश के बाद बीमा कंपनी ने 30 जून 2026 को 48,921 रुपए का चेक आयोग के सामने पेश कर दिया। इसके बाद 8 जुलाई 2026 को हुई कार्यवाही के दौरान हरीसिंह के वकील की मौजूदगी में उन्हें यह चेक सौंप दिया गया। इसके साथ ही आयोग ने मामले का निस्तारण कर दिया। आयोग ने कहा- उपभोक्ताओं को अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए आयोग ने कहा कि जिला उपभोक्ता आयोग उपभोक्ताओं को जल्दी और प्रभावी न्याय दिलाने के लिए काम कर रहा है। आयोग के अनुसार यह मामला दिखाता है कि यदि उपभोक्ता अपने अधिकारों को लेकर जागरूक रहें और कानूनी प्रक्रिया अपनाएं, तो उन्हें उनका हक मिल सकता है।