राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (RSCERT) में शुक्रवार को वेलनेस सेंटर का शुभारंभ किया गया। इसके जरिए टीचर ट्रेनिंग ले रहे हैं। वे नीचे जाकर स्कूलों के स्टूडेंट की मदद करेंगे। परिषद की निदेशक श्वेता फगेड़िया ने सेंटर का उद्घाटन करते हुए कहा- वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण हो गया है। बदलती जीवनशैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और डिजिटल दुनिया के प्रभाव के कारण बच्चों में तनाव, चिंता और भावनात्मक असंतुलन जैसी समस्याएं पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही हैं। उन्होंने कहा- पहले बच्चे खुले माहौल में खेलते-कूदते थे। अपेक्षाकृत अधिक बेफिक्र रहते थे, लेकिन आज कई बच्चे तनाव, चिंता और मानसिक दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें सही दिशा देना समय की आवश्यकता है। फगेड़िया ने बताया कि परिषद ने शिक्षकों के लिए एक विशेष मॉड्यूल तैयार किया है। इसके माध्यम से शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे स्टूूडेंट्स की भावनाओं को पहचाने, उन्हें सकारात्मक रूप से व्यक्त करने तथा तनाव और क्रोध जैसी परिस्थितियों का बेहतर तरीके से सामना करने में मदद कर सकें। प्रशिक्षण में यह भी बताया जाएगा कि तनाव और गुस्से के पीछे के कारणों को कैसे समझा जाए और उन्हें प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के उपाय क्या है। उनका कहना था कि यदि बच्चों को शुरुआती स्तर पर ही भावनात्मक रूप से सशक्त बनाया जाए तो वे पढ़ाई के साथ-साथ जीवन की चुनौतियों का भी आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकेंगे। परिषद से डॉ. आभा शर्मा और पिरामल फाउंडेशन से प्रवीण कुमार और मणि कुमार ने अतिथियों को 'वेलनेस जोन' की परिकल्पना, दीवारों पर बनाई गई अवधारणाओं, और भावनाओं के चक्र से परिचित कराया। कार्यक्रम में अतिथियों ने पांच मिनट के एक रेसोर्सिंग ध्यान सत्र का अनुभव लिया और अपने विचार साझा किए। जानिए वेलनेस सेंटर के बारे में सहेली रोड स्थित RSCERT कार्यालय के अंदर वेलनेस सेंटर बनाया है। इस केंद्र पर मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए परामर्श, प्रशिक्षण और विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएगी। केंद्र विद्यार्थियों और शिक्षकों को तनावमुक्त, सकारात्मक और संतुलित जीवनशैली अपनाने में मदद करेगा। यहां से प्रशिक्षित शि​क्षक स्टूडेंट की मदद करेंगे वेलनेस सेंटर से प्रशिक्षित होने वाले टीचर अपने स्कूल के स्टूडेंट की मदद करेंगे। उनकी बात और भावनाओं को समझ कर उनको गाइड करेंगे। इसमें विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव और चिंता को कम करने से लेकर परीक्षा, प्रतिस्पर्धा और सोशल मीडिया के दबाव से निपटने में सहायता करेंगे। भावनात्मक संतुलन और मानसिक मजबूती विकसित करने, व्यवहार संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान और समाधान तथा सकारात्मक और सुरक्षित शिक्षण वातावरण तैयार करने पर खास फोकस होगा।