राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि सेवा का उद्देश्य सिर्फ जरूरतमंदों की मदद करना नहीं, बल्कि उन्हें इतना सक्षम बनाना है कि वे आगे चलकर दूसरों की मदद कर सकें। इसके लिए समाज के समर्थ लोगों को बस्तियों में जाकर वहां के परिवारों और बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए। जन्मदिन और दीपावली जैसे अवसर भी उनके बीच मनाने चाहिए। होसबाले सोमवार को जयपुर के टैगोर इंटरनेशनल स्कूल के ऑडिटोरियम में सेवा भारती जयपुर इकाई के वार्षिकोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया- जयपुर की 257 सेवा बस्तियों में 379 सेवा कार्य चल रहे हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े काम शामिल हैं। उन्होंने कहा- समाज में आर्थिक दृष्टि और सामाजिक दृष्टि से जो कमजोर वर्ग रहता है। उनके लिए स्लम-मलीन बस्ती नाम का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन संघ के लोगों ने विचार कर इसे स्लम बस्ती न कहकर सेवा बस्ती कहने का निर्णय लिया। जिन बस्तियों में सेवा की आवश्यकता है। सेवा करते हुए उन बस्ती के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य स्वाबलंबन सुरक्षा स्वाभीमान की कमी है। ऐसे अभावग्रस्त बस्तियों के लिए अच्छी स्थिति वाले लोगों का सामाजिक दायित्व बनता है। उन लाेगों के लिए कुछ करें। मदद के साथ लोगों को जोड़ना भी जरूरी होसबाले ने कहा- सेवा ऐसी होनी चाहिए कि आज जो लोग मदद ले रहे हैं, वे आगे चलकर सेवा देने वाले बनें। जरूरतमंदों को सुविधाएं देने के साथ उनमें आत्मविश्वास और स्वाभिमान बढ़ाना भी जरूरी है। हर व्यक्ति समाज के लिए योगदान दे सकता है। इसलिए सेवा बस्तियों में रहने वाले लोगों को केवल मदद पाने वाला मानने के बजाय उन्हें समाज का बराबर का हिस्सा समझना चाहिए। देशभर में चल रहे डेढ़ लाख सेवा कार्य होसबाले ने बताया कि सेवा भारती से जुड़ी संस्थाएं देशभर में करीब डेढ़ लाख छोटे-बड़े सेवा कार्य चला रही हैं। इनमें स्वयंसेवकों के साथ समाज के दूसरे लोग भी योगदान दे रहे हैं। सेवा के लिए आर्थिक सहयोग देने के साथ लोगों को खुद भी समय निकालकर काम करना चाहिए। उन्होंने सेवा बस्तियों में चल रहे संस्कार केंद्रों में जाने, बच्चों के साथ समय बिताने और परिवारों को सेवा कार्यों से जोड़ने पर जोर दिया। इससे समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच अपनापन बढ़ेगा। सेवानिवृत्त चिकित्सकों के सेवाभाव का दिया उदाहरण होसबाले ने सेवा सदन में काम करने वाले सेवानिवृत्त चिकित्सकों का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि एक चिकित्सक रोजाना चार-पांच किलोमीटर दूर से सेवा कार्य के लिए आते हैं। सेवा में दूरी से ज्यादा भावना मायने रखती है। कार्यक्रम में नवल पीठाधीश्वर संत मुन्ना दास जी खोडा का सान्निध्य रहा। मंगलम् ग्रुप के निदेशक संजय गुप्ता मुख्य अतिथि तथा निखिल जैन और विजेंद्र सिंह तंवर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस दौरान सेवा भारती की वेबसाइट और एप लॉन्च किए गए। 'भारतीय संस्कृति में सेवा परंपरा' पुस्तक के विशेषांक का विमोचन हुआ। विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र स्थित यशोदा बाल सेवा केंद्र के नए भवन का डिजिटल उद्घाटन भी किया गया। सेवा बस्तियों के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर नाटक पेश किया।