अजमेर रोड पर मंगलवार को हुए हादसे ने परिवहन व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर हीरापुरा बस स्टैंड शुरू किया, लेकिन छह महीने बाद भी अधिकांश बसें बस स्टैंड परिसर में प्रवेश नहीं कर रहीं। वहीं 200 फीट और नए स्टैंड के बीच 10 अवैध स्टॉपेज बन गए हैं। यहां बसें यात्रियों को उतारने और चढ़ाने का काम कर रही हैं। इसी अवैध बस स्टॉप पर राजसमंद जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे लोगों को तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया। हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया। जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां लंबे समय से सुबह और शाम प्राइवेट बसों का संचालन और सवारियां चढ़ाने-उतारने का काम हो रहा था। इसके बावजूद RTO, पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से अवैध बस स्टॉप हटाने या बसों को वहां रुकने से रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब हादसा होते ही मंगलवार को पुलिस मुस्तैद हो गई और बसों को नहीं रुकने दिया। हीरापुरा में आधिकारिक बस स्टैंड मौजूद होने के बावजूद उसका अपेक्षित उपयोग नहीं हो रहा। 200 फीट चौराहा, हाईवे किंग के बाहर बसों का अवैध ठहराव किया जा रहा है। इससे परिवहन व्यवस्था के क्रियान्वयन और निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।