सलूम्बर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से शुरू हुआ 'क्लीन सलूम्बर-ग्रीन सलूम्बर' अभियान अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। इसी कड़ी में शनिवार को शहर के जागरूक नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने सेरिंग तालाब के घाटों पर श्रमदान किया। इस प्रयास से गंदगी से बदहाल हो चुके घाटों की सूरत बदल गई है और वे अपनी पुरानी रौनक में लौट आए हैं। अभियान का अगला प्रमुख लक्ष्य पुरानी पुरोहितवाड़ी स्कूल है। ये स्कूल वर्ष 2015-2016 में अन्य स्कूल में विलय होने के बाद बंद हो गई थी। बंद होने के बाद से यह भवन उपेक्षा का शिकार होकर खंडहर में तब्दील हो गया था, और परिसर कंटीली झाड़ियों से भर गया था। अब पर्यावरण समूह के सदस्यों ने इस पुरानी स्कूल के कायाकल्प का बीड़ा उठाया है। उन्होंने संकल्प लिया है कि परिसर से झाड़ियों को हटाकर उसे फिर से साफ किया जाएगा। वरिष्ठ पर्यावरण प्रेमी राकेश प्रजापत ने कहा, "हमारा लक्ष्य केवल सफाई करना नहीं, बल्कि अपनी धरोहरों को उनके पुराने गौरव तक वापस लाना है। हर शनिवार एक घंटा शहर के नाम देने का हमारा संकल्प अब परिणाम दिखा रहा है।" अभियान के तहत, सभी सदस्य प्रत्येक शनिवार सुबह एक घंटा तालाब और सार्वजनिक स्थलों की सफाई के लिए समर्पित करते हैं। पर्यावरण प्रेमियों ने तालाब को प्लास्टिक और पॉलीथिन से पूरी तरह मुक्त करने का भी संकल्प लिया है। इसके अलावा, तालाब किनारे और आसपास के जाम पड़े नालों से कचरा हटाकर जल निकासी को सुचारु किया गया है। श्रमदान के दौरान वरिष्ठ पर्यावरण प्रेमी राकेश प्रजापत ने आमजन से पॉलीथिन का उपयोग बंद करने की अपील की। इस बार महेश आमेटा, विमल आमेटा, राकेश प्रजापत, शंकर भोई, शिवानंद पुरोहित, विमल भट्ट, रमाकांत सकरावत, सुभाष नेभनानी और परीक्षित प्रजापत सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।