सलूंबर जिले में रहस्यमयी बीमारी से अब तक 8 बच्चों की मौत हो चुकी है। प्रशासन घर-घर जाकर सर्वे कर रहा है। बच्चों के सैंपल ले रहा है। बीमार मिलने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है, लेकिन अब तक बच्चों की मौत का कारण सामने नहीं आ सका है। दैनिक भास्कर ने मौके पर जाकर देखा तो यह जानकारी सामने आई कि जिले के इन क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और सड़क सही नहीं है। इससे परिजन बीमार बच्चों को तुरंत इलाज के लिए नहीं ले जा पाए। अस्पताल पहुंचने में देरी के कारण भी बच्चों की मौत हो गई। वहीं एक बच्ची के परिजन उसे भोपा के पास ले गए। भोपा ने ठीक होने का आश्वासन दिया, लेकिन बच्ची की जान चली गई। खस्ताहाल सड़क के कारण एंबुलेंस ड्राइवर भी आने से मना कर देते हैं। करीब 10 साल से लसाड़िया-धरियावाद रूट पर सड़क नहीं बनी है। सलूंबर के लसाड़िया से दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में जानें परिजनों का दर्द। पिता बोले- दो बेटों की मौत, कारण पता नहीं लालपुरा गांव निवासी मानूराम मीणा के दो बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने बताया- बेटे दीपक मीणा (4) की तबीयत 31 मार्च को खराब हुई थी। वह खाना खाकर सो गया था। रात करीब 11 बजे उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। इसके बाद उसे प्राइवेट एंबुलेंस से धरियावद सरकारी अस्पताल लेकर गए। तबीयत में सुधार नहीं होने पर प्रतापगढ़ जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया। 1 अप्रैल को डॉक्टर्स ने उसे उदयपुर रेफर कर दिया, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। मानूराम ने बताया- 3 अप्रैल को दूसरा बेटा लक्ष्मण (7) चाय पीने के बाद लेट गया था। हमने बाद में देखा तो उसकी तबीयत खराब थी। उसे धरियावद लेकर गए, लेकिन हालत गंभीर देखकर सलूंबर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां डॉक्टर्स ने तुरंत उदयपुर रेफर किया। दो दिन चले इलाज के बाद 5 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। दो दिन बच्चा कुछ नहीं बोला। जन्म प्रमाण पत्र के बिना आधार कार्ड नहीं बन सका मानूराम मीणा ने बताया- दोनों बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र नहीं बना तो आधार कार्ड भी नहीं बन सका था। इस कारण वे स्कूल नहीं जाते थे। बाद में जन्म प्रमाण पत्र बन गया तो आधार कार्ड नहीं बना, जिससे बच्चों का स्कूल में एडमिशन नहीं हो सका। लक्ष्मण मीणा बोले- प्रशासन इस बीमारी का इलाज ढूंढे घाटा गांव निवासी लक्ष्मण मीणा ने बताया- बेटे राहुल मीणा (4) को 4 अप्रैल को बुखार और उल्टी की समस्या हुई। उसे धरियावद सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया। यहां से प्रतापगढ़, फिर सलूंबर रेफर किया। 5 अप्रैल को उदयपुर रेफर कर दिया। वहां आरएनटी मेडिकल कॉलेज में देर शाम राहुल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। प्रशासन इस बीमारी का इलाज ढूंढे। किसी और के साथ ऐसा हादसा नहीं हो। अफसर बस आश्वासन देते हैं रिटायर्ड आयुर्वेदिक कंपाउंडर केशव लाल मीणा ने बताया- सड़क खराब होने से एक्सीडेंट होते हैं। कई बार रास्ता जाम किया। इसके बाद अफसर आश्वासन देते हैं, लेकिन आज तक सड़क नहीं बनी। अगर सड़क सही होती तो बच्चे समय पर अस्पताल पहुंच जाते। रेफर करने के बाद बच्चों को सलूंबर जाने में 3 घंटे लगे। उन्होंने कहा- लसाड़िया और धरियावद के अलावा 35 किलोमीटर क्षेत्र में कोई भी प्राथमिक चिकित्सा केंद्र नहीं है। वहीं इलाज के नाम पर झोलाछाप घूमते रहते हैं। मैं फर्स्टएड कर देता हूं। इसके बाद रेफर किया जाता है। खराब सड़क से रास्तों में ही महिलाओं की डिलीवरी हो जाती है। उन्होंने कहा- फोन करने के लिए परिजनों के पास फोन नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं थी। भोपा ने दिया आश्वासन, बच्ची की गई जान घाटा गांव निवासी प्रकाश मीणा की बेटी काजल (2) की 5 अप्रैल को मौत हुई थी। जब हमने उनसे बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया। जानकारी के अनुसार, 24 घंटे से बच्ची को शरीर में तेज ऐंठन और उल्टी की दिक्कत हो रही थी। परिजन उसे देवरे में ले गए थे। एक भोपा ने ठीक होने का आश्वासन दिया था, लेकिन बच्ची की जान चली गई। बच्ची की मौत के बाद भी परिजन उसे अस्पताल नहीं ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया। किसी बच्चे का नहीं हुआ पोस्टमॉर्टम खास बात यह है कि किसी भी बच्चे का पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ है। ऐसे में मौत का वास्तविक कारण कैसे पता लग पाएगा? पोस्टमॉर्टम के लिए किसी भी मौत का अन-नेचुरल माना जाना जरूरी है। बच्चों की मौत के समय किसी ने भी ध्यान नहीं दिया तो पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका। नियमों के अनुसार किसी भी मृतक के परिजन की सहमति भी जरूरी होती है। ऐसे में जागरूकता की कमी के चलते भी परिजन पोस्टमॉर्टम नहीं चाहते थे। सहयोग- भेरूलाल आमेटा, लसाड़िया। … ये खबर भी पढ़ें… रहस्यमयी बीमारी से 8 दिन में 8 बच्चों की मौत:3 और बच्चों ने बुखार-उल्टी के बाद दम तोड़ा; 500 से ज्यादा परिवारों का किया सर्वे सलूंबर जिले में रहस्यमयी बीमारी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीमारी से पिछले 2 दिन में 3 और बच्चों की मौत हो गई। झल्लारा और लसाड़िया क्षेत्र में पिछले 8 दिन में 8 बच्चों की मौत हो गई है। (पूरी खबर पढ़ें)