सलूम्बर जिले में जमीन के संपरिवर्तन (खेती की जमीन का दूसरे उपयोग के लिए रूपांतरण) के एक मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। सलूम्बर तहसीलदार और झल्लारा के अतिरिक्त तहसीलदार डॉ. मयूर शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जिला कलेक्टर मुहम्मद जुनैद ने उनके खिलाफ चार्जशीट जारी की है। यह कार्रवाई लोगों की शिकायतों, तहसीलदार से मांगे गए जवाब और जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद की गई है। बिना मौके पर गए दे दिया जमीन रूपांतरण का आदेश चार्जशीट में पहला आरोप है कि डॉ. मयूर शर्मा ने झल्लारा तहसील के देवलाकला गांव की एक जमीन का संपरिवर्तन आदेश जारी करने से पहले खुद मौके पर जाकर निरीक्षण नहीं किया। अपने जवाब में उन्होंने माना कि प्रशासनिक काम ज्यादा होने की वजह से वे मौके पर नहीं जा सके। लेकिन जिला प्रशासन का कहना है कि जमीन का संपरिवर्तन मंजूर करने से पहले अधिकारी का मौके पर जाकर स्थिति देखना जरूरी होता है। निर्माण पहले से था, फिर भी नहीं लगाया जुर्माना दूसरा आरोप यह है कि जिस जमीन का संपरिवर्तन किया गया, वहां आवेदन देने से पहले ही करीब 456 वर्गमीटर में मकान का निर्माण लिंटल स्तर तक हो चुका था। नियमों के मुताबिक ऐसी स्थिति में जुर्माना (पेनल्टी) लगाया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे सरकार को समय पर राजस्व नहीं मिल पाया। बाद में 16 जून को 6,840 रुपये जमा करवाए गए, लेकिन प्रशासन का कहना है कि यह रकम पहले ही वसूली जानी चाहिए थी। प्रतिबंधित जमीन को भी नहीं किया अलग तीसरा आरोप यह है कि संपरिवर्तन आदेश जारी करते समय एक पुराने रास्ते (कदीमी रास्ता) से लगी करीब 200 वर्गमीटर जमीन को प्रतिबंधित क्षेत्र मानकर अलग नहीं किया गया। बाद में जब मामले की जांच हुई तो 18 जून को नया आदेश जारी कर कुल 2400 वर्गमीटर जमीन में से 2200 वर्गमीटर का संपरिवर्तन बरकरार रखा गया, जबकि 200 वर्गमीटर जमीन को संपरिवर्तन से बाहर कर दिया गया। संशोधित आदेश के बाद शुरू हुई विभागीय जांच जिला प्रशासन का कहना है कि बाद में आदेश बदलना इस बात का संकेत है कि पहली बार आदेश जारी करते समय जमीन के रिकॉर्ड और मौके की सही तरीके से जांच नहीं की गई थी। इसी वजह से तहसीलदार डॉ. मयूर शर्मा के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा नियमों के तहत विभागीय जांच शुरू कर चार्जशीट जारी की गई है।