कोटगेट और सांखला फाटक पर रेलवे अंडर ब्रिज (आरयूबी) निर्माण का विवाद एक बार फिर राजस्थान उच्च न्यायालय की दहलीज पर है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने गुरुवार को जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाया। न्यायालय ने बीकानेर कलेक्टर और सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता को 19 मई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अनिल व्यास ने तर्क दिया कि सरकार जिस योजना पर अड़ी है, वह व्यावहारिक नहीं है। ऐतिहासिक कोटगेट बीकानेर की विरासत है, जिसके अस्तित्व से छेड़छाड़ स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट में यह गंभीर बिंदु उठाया गया कि शहर के भीतर आने वाले पानी की निकासी को रोकना और उसी स्थान पर अंडरपास बनाना एक तकनीकी विरोधाभास है। कोटगेट को सुरक्षित रखना, जल निकासी का प्रबंधन और अंडरपास निर्माण, ये तीनों कार्य एक साथ सफलतापूर्वक करना संभव नहीं है। विरासत बचाएं या अंडरपास बनाएं? ऐतिहासिक कोटगेट, जल निकासी और आरयूबी निर्माण के ‘त्रिकोणीय’ पेंच में प्रशासन प्रतिवादी पक्ष की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भारत व्यास व अन्य अधिवक्ताओं ने आरयूबी की ‘फिजिबिलिटी रिपोर्ट’ पेश करने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अब बीकानेर विकास प्राधिकरण सहित सभी प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का यह अंतिम अवसर दिया गया है। मामले में राम कृष्ण दास गुप्ता, मुकुल कृष्ण व्यास और बीकानेर व्यापार एसोसिएशन की याचिकाओं पर पैरवी की जा रही है। 50 साल पुराना दर्द और प्रोजेक्ट्स का फेरबदल “जो भी इस शहर में रहता है उसे अच्छी तरह पता है कि बारिश का पानी परकोटे की ओर से नदी की तरह बहता हुआ आता है। अंडरपास में पानी जाने से रोकने का कोई विकल्प नहीं है। कोटगेट ऐतिहासिक धरोहर है उसे छेड़े बिना अंडरपास कैसे बन सकता है। बाईपास के लिए पहले जमीन आरक्षित हो गई फिर उस पर काम क्यों नहीं हो रहा। अब 19 मई को प्रशासन को जवाब देने के लिए बुलाया गया है।” -आर.के.दास गुप्ता, एडवोकेट