राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने कहा- दिल्ली जाने का मतलब पैरवी करना होता है। योजनाओं का रिव्यू कर बजट लाना होता है। यह कांग्रेस में होता है कि 'दिल्ली जाओ, कांग्रेस बचाओ'। पूर्व सीएम अशोक गहलोत को लेकर भी पूनिया ने कहा- रिफाइनरी के काम को लेकर उन्हें कंजूसी न करके इसकी तारीफ करनी चाहिए। मीडिया ने जब ऊंटों के संरक्षण को लेकर सवाल किया गया, तो वे बोले- मैं कार्यकर्ताओं से मजाक में कहता हूं कि जो ऊंट रखेगा, उसे टिकट मिलेगा। नई जिम्मेदारी मिलने पर पूनिया ने कहा- मैंने भी सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम किया था, समय के साथ मेरी भूमिका बदलती रही। जोधपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने सोमवार को ये बातें कहीं। राहुल गांधी और गहलोत किसी सिस्टम को मानने को तैयार नहीं मीडिया ने सवाल पूछा कि सीएम बार-बार दिल्ली जाते हैं और विपक्ष बयान देता है कि कुछ बदलने वाला है। इस पर पूनिया ने कहा- दिल्ली जाने का मतलब योजनाओं का रिव्यू कर उनका बजट लाना और प्रदेश के लिए पैरवी करना होता है। पूनिया ने आगे कहा- सीएम ने भी कहा था कि जब भी मैं दिल्ली जाता हूं, कुछ न कुछ लेकर आता हूं और वे लेकर भी आए। यह कांग्रेस में जरूर होता है कि 'दिल्ली जाओ, कुर्सी बचाओ'। यह बीजेपी में नहीं होता। परिसीमन को लेकर पूनिया ने कहा- यह सब एक सिस्टम का हिस्सा है। लेकिन राहुल गांधी, कांग्रेस और अशोक गहलोत किसी भी सिस्टम को मानने को तैयार नहीं हैं। लोग घोषणा और भाषण नहीं, परिणाम देखते हैं मीडिया ने सतीश पूनिया से रिफाइनरी के क्रेडिट लेने को लेकर सवाल किया गया, तो पूनिया ने कहा- लोग घोषणा और भाषण नहीं, परिणाम देखते हैं। 2013 में जब उनकी विदाई तय हो चुकी थी, तब सोनिया गांधी को बुलाकर इसकी शुरुआत की गई थी। राजस्थान में एक मिजाज रहा है कि केंद्र और राज्य में एक सरकार नहीं रही। केंद्र में मोदी की सरकार थी और राज्य में गहलोत की सरकार थी, तो गहलोत सरकार में जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। गहलोत पर पलटवार करते हुए कहा- गहलोत ने केंद्र सरकार की योजनाओं को विफल किया। रिफाइनरी की घोषणा भले ही गहलोत ने की हो, लेकिन उसे धरातल पर लाने का काम बीजेपी ने किया है। अशोक गहलोत को इस काम की प्रशंसा करनी चाहिए। ऐसी कई योजनाएं और बातें हैं, जिन पर उन्हें उदारता रखते हुए तारीफ करने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए। पूनिया बोले- प्रदेश में ऊंट संरक्षण पर चल रहा है रिसर्च दरअसल, सतीश पूनिया रविवार को बीकानेर गए थे। यहां वे नेशनल केमल रिसर्च सेंटर भी गए थे। पूनिया ने बताया- हम किताबों में पढ़ते हैं कि ऊंट रेगिस्तान का जहाज है। जहां भी राजस्थान की बात होती है, वहां ऊंट जरूर होता है। बीकानेर का राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र (नेशनल केमल रिसर्च सेंटर) ऊंटों की प्रजाति और संरक्षण के लिए काम कर रहा है। ऊंट के प्रोडक्ट्स जैसे दूध और आइसक्रीम बन रहे हैं। एक रिसर्च चल रही है कि रायका और रेबारी समाज के लोग जो ऊंट चराते हैं, उनमें डायबिटीज नहीं होती। इस रिसर्च को लेकर टीम काम कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि कार्यकर्ताओं को ऊंट बचाने के लिए क्या मैसेज देंगे, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा- मैं कार्यकर्ताओं को मजाक में यही कहता हूं कि जो ऊंट रखेगा, उसे टिकट मिलेगा।